बड़ी कामयाबी: लखनऊ को दहलाने की साजिश नाकाम, बिजनौर से दो संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
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लखनऊ। शनिवार, 11 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ते हुए एक बड़े हमले की साजिश को विफल कर दिया है। यूपी एंटी टेरर स्क्वाड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने बिजनौर से दो संदिग्ध आतंकियों—उवैद मलिक और जलाल हैदर उर्फ समीर—को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि इनका मुख्य निशाना राजधानी लखनऊ का व्यस्ततम चारबाग रेलवे स्टेशन था।

दुबई और पाकिस्तान से जुड़े हैं साजिश के तार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन का रिमोट कंट्रोल सीमा पार और विदेशों में बैठा था।

  • दुबई कनेक्शन: साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड आकिब बताया जा रहा है, जो दुबई में बैठकर नेटवर्क को फंड कर रहा था।

  • पाकिस्तानी हैंडलर्स: आकिब सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और आतंकियों के संपर्क में था।

  • डिजिटल रेडिकलाइजेशन: आकिब सोशल मीडिया (Telegram और Signal) के जरिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था और उन्हें ‘लोन वुल्फ’ हमले या आईईडी (IED) ब्लास्ट के लिए तैयार कर रहा था।

AK-47 वाले वायरल वीडियो ने खोली पोल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा एक पुराने वीडियो से हुआ। नवंबर 2025 में आरोपितों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे प्रतिबंधित हथियारों (AK-47) और हैंड ग्रेनेड के साथ नजर आ रहे थे। हालांकि, उस वक्त ठोस सबूतों के अभाव में केस ठंडे बस्ते में चला गया था, लेकिन यूपी पुलिस ने इस डिजिटल सुराग को दोबारा खंगाला और गुप्तचरों की मदद से इस पूरी सेल का भंडाफोड़ किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों की तलाश

गिरफ्तार आरोपितों के अलावा इस नेटवर्क के कुछ और सदस्य विदेशों में पनाह लिए हुए हैं।

  1. मैजुल (दक्षिण अफ्रीका): सुरक्षा एजेंसियों को इसके वहां छिपे होने की जानकारी मिली है।

  2. आजाद (सऊदी अरब): इसके खिलाफ भी खुफिया इनपुट मिले हैं।

इन दोनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया गया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर फरार समीर उर्फ रुहान की गिरफ्तारी के लिए नजीबाबाद सहित पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में छापेमारी जारी है।

कड़ी कार्रवाई: पासपोर्ट होंगे रद्द

सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गिरफ्तार और संदिग्ध आरोपितों के पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि वे कानूनी शिकंजे से भाग न सकें। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि यह गिरफ्तारी समय रहते नहीं होती, तो लखनऊ में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • निशाना: लखनऊ रेलवे स्टेशन (भीड़भाड़ वाला समय)।

  • हथियार: AK-47 और ग्रेनेड का जिक्र वायरल वीडियो में।

  • एजेंसी: UP ATS और STF का जॉइंट ऑपरेशन।

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