अंकिता भंडारी केस: ‘VIP’ के नाम पर आर-पार; उत्तराखंड बंद का मिला-जुला असर, SC की निगरानी में CBI जांच की मांग

Saransh Kanaujia
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देहरादून. अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘VIP’ के नाम का खुलासा करने और मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई (CBI) से कराने की मांग को लेकर आज विभिन्न संगठनों द्वारा आहूत ‘उत्तराखंड बंद’ का राज्य में मिला-जुला असर देखने को मिला।

पहाड़ों में थमा पहिया, मैदानों में स्थिति सामान्य

बंद का सबसे व्यापक असर राज्य के पर्वतीय जिलों में देखा गया। चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय व्यापारियों और संगठनों के समर्थन के चलते बाजार पूरी तरह बंद रहे और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। इसके विपरीत, राजधानी देहरादून और अन्य मैदानी शहरों में जनजीवन काफी हद तक सामान्य रहा।

व्यापारियों में वैचारिक मतभेद

बंद को लेकर व्यापारिक संगठनों की राय बंटी हुई नजर आई। देहरादून के प्रमुख संगठन ‘दून उद्योग व्यापार मंडल’ ने इस बंद से खुद को दूर रखा। व्यापारियों का तर्क है कि:

  • राज्य सरकार द्वारा पहले ही CBI जांच की सिफारिश की जा चुकी है।

  • दोषियों को पहले ही (मई 2025 में) आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है।

  • बार-बार बंद से स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम जनता को असुविधा होती है।

“केवल जांच नहीं, न्याय चाहिए”: परिजनों की मांग

हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए CBI जांच की सिफारिश कर दी थी, लेकिन अंकिता के माता-पिता और प्रदर्शनकारी इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. SC की निगरानी: जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में कराया जाए।

  2. VIP का खुलासा: उस ‘VIP’ का नाम सार्वजनिक किया जाए जिसके कारण यह पूरी घटना हुई।

हालिया पुलिस कार्रवाई: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने कथित ‘VIP’ की पहचान के लिए एक नई FIR भी दर्ज की है, ताकि कानूनी रूप से इस रहस्यमयी किरदार तक पहुँचा जा सके।

पृष्ठभूमि

सितंबर 2022 के इस चर्चित हत्याकांड में मुख्य आरोपियों को पिछले साल मई में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन हाल के महीनों में ‘VIP एंगल’ को लेकर एक बार फिर जन-आक्रोश भड़क उठा है, जिसने राज्य सरकार को इस मामले में CBI हस्तक्षेप की सिफारिश करने पर मजबूर किया है।

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