सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़: केरल के इन्फ्लुएंसर पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

तिरुवनंतपुरम । गुरुवार, 9 जुलाई 2026

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर वायरल होना आज के समय की सबसे बड़ी करेंसी बन चुका है। लेकिन इस ‘वायरल’ होने की होड़ में कुछ लोग नैतिक सीमाओं और सामाजिक सद्भाव को पूरी तरह भूल जाते हैं। हाल ही में केरल में रहने वाले एक क्रिएटर ‘हैदर अली’ (इंस्टाग्राम आईडी: akhaidar__) का मामला सामने आया है, जिसने कथित तौर पर हिंदू समुदाय की धार्मिक आस्था के प्रतीक ‘गौमाता’ को लेकर न केवल बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से एक के बाद एक कई भड़काऊ वीडियो अपलोड किए।

यह पूरा मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता और रीच पाने के लिए किसी समुदाय की आस्था को हथियार बनाते हैं।

पहली वीडियो से शुरू हुआ विवादों का सिलसिला

शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस क्रिएटर ने 16 मई से अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऐसे वीडियो डालने शुरू किए थे। पहली वीडियो में केवल खाना पकते हुए दिखाया गया था और कैप्शन में ‘गाय का मीट’ लिखा गया था। जब इस वीडियो पर सामान्य से अधिक रीच और व्यूज मिले, तो क्रिएटर ने इसे अपनी रीच बढ़ाने का एक ‘शॉर्टकट ट्रिक’ समझ लिया।

इसके बाद, क्रिएटर और उसकी पत्नी द्वारा लगातार ऐसे वीडियो बनाए गए, जिनमें जानबूझकर हिंदू समुदाय को चिढ़ाने और भड़काने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया गया। वीडियो में बार-बार ‘अंधभक्तों’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना और “तुम्हारी गौमाता का मीट खा रहे हैं, दम है तो रोक लो” जैसी सीधी चुनौतियाँ देना यह साफ करता है कि यह केवल खान-पान की आदत को साझा करना नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी डिजिटल रणनीति थी।

व्यूज का लालच और कट्टरपंथी मानसिकता

सोशल मीडिया का एल्गोरिदम विवादित (Controversial) कंटेंट को बहुत तेजी से बढ़ावा देता है। जब इस क्रिएटर के वीडियोज पर लाखों में व्यूज और हजारों लाइक्स आने लगे, तो उसने इसे ही अपनी सफलता का मंत्र मान लिया। हिंदुओं द्वारा कमेंट्स में विरोध दर्ज कराने पर उसने माफी माँगने के बजाय और अधिक आक्रामक और अपमानजनक वीडियोज पोस्ट करना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि इंस्टाग्राम (मेटा) जैसी बड़ी टेक कंपनियाँ, जो अपनी ‘कम्युनिटी गाइडलाइंस’ को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हैं, उन्होंने इस तरह के खुलेआम नफरत फैलाने वाले अकाउंट पर तुरंत कोई सख्त एक्शन नहीं लिया।

कानून और साइबर सेल की भूमिका

भारत में किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाना, समाज में वैमनस्य फैलाना और शांति भंग करने की कोशिश करना एक गंभीर दंडनीय अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का प्रावधान है। सोशल मीडिया पर इस क्रिएटर के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की माँग लगातार उठ रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने पर कौन सी कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

उत्तर: भारतीय कानून के तहत धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने पर पुलिस साइबर सेल या स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सकती है। इसमें आरोपी को जेल और जुर्माने दोनों की सजा हो सकती है।

प्रश्न 2: क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसी पोस्ट्स को खुद नहीं हटाते?

उत्तर: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के अपने ऑटोमेटेड सिस्टम और कम्युनिटी गाइडलाइंस होती हैं। हालांकि, कई बार जब तक किसी पोस्ट या अकाउंट को बड़े पैमाने पर ‘रिपोर्ट’ (Report) न किया जाए या वह मामला मुख्यधारा की मीडिया में न आए, तब तक एल्गोरिदम इसे नहीं पकड़ पाता।

प्रश्न 3: केरल में बीफ (गौमांस) को लेकर क्या कानून है?

उत्तर: भारत के अधिकांश राज्यों में गोवंश के वध पर प्रतिबंध है, लेकिन केरल, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इसके उपभोग पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, कानूनी रूप से वैध होने के बावजूद, किसी अन्य समुदाय को चिढ़ाने या उनकी आस्था का अपमान करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर भड़काऊ प्रदर्शन करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख सोशल मीडिया पर चल रहे हालिया घटनाक्रमों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करना या समाज में विद्वेष फैलाना नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *