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भारत-अमेरिका व्यापारिक तनाव: 500% टैरिफ की धमकी पर भारत का पलटवार, ऊर्जा सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

Saransh Kanaujia
3 Min Read

नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और ऊर्जा नीतियों को लेकर कूटनीतिक तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। रूस से तेल आयात के मुद्दे पर अमेरिकी सांसदों द्वारा भारी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के बाद भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। साथ ही, भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी नेतृत्व के बीच हुई बातचीत पर अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

 रूसी तेल पर 500% टैरिफ की धमकी का विरोध

अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें रूस से कच्चे तेल का आयात करने वाले देशों पर 500% तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस विधेयक का सीधा असर भारत पर पड़ने की संभावना है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से कोई समझौता नहीं करेगा। मंत्रालय के अनुसार, रूस से तेल की खरीद पूरी तरह से बाजार की स्थितियों और भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की जा रही है ताकि घरेलू बाजार में तेल की कीमतें स्थिर बनी रहें।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का स्पष्ट रुख

विदेश मंत्रालय ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि:

  • भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार के सबसे सस्ते और सुलभ विकल्पों को चुनने के लिए स्वतंत्र है।

  • यह फैसला पूरी तरह से व्यावसायिक है और किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव में नहीं लिया गया है।

‘बातचीत’ को लेकर अमेरिकी दावे का खंडन

व्यापारिक तनाव के बीच, संचार माध्यमों को लेकर भी विरोधाभास सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव गीना रायमोंडो ने दावा किया था कि 2025 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई।

भारत सरकार ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। भारत की ओर से जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया है कि साल 2025 में दोनों नेताओं के बीच कुल 8 बार टेलीफोन पर बातचीत हुई थी, जो दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद को दर्शाती है।

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