भारत बना ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब: केंद्र सरकार ने ₹62,500 करोड़ की MPMS योजना को दी मंजूरी

Saransh Kanaujia
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मुंबई | रविवार, 23 अगस्त 2026
भारत को दुनिया का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹62,500 करोड़ के बजट प्रावधान के साथ Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को मंजूरी दे दी है।
यह योजना केवल भारत में मोबाइल असेंबल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में ही डिजाइनिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), और पार्ट्स निर्माण (Component Manufacturing) का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर केंद्रित है।

MPMS योजना के मुख्य बिंदु और वित्तीय प्रोत्साहन

  • योजना की अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 (कुल 5 वर्ष) तक लागू रहेगी।
  • उत्पादन लक्ष्य: 5 वर्षों के दौरान ₹39 लाख करोड़ के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का अनुमान है।
  • रोजगार के अवसर: इससे देश में लगभग 60,000 प्रत्यक्ष (Direct) नौकरियों का सृजन होगा।
  • मूल इंसेंटिव: भारत में निर्मित मोबाइल फोन की बिक्री पर कंपनियों को 2.25% से 5% तक का प्रोत्साहन मिलेगा।
  • घरेलू कंपोनेंट बोनस: लोकल डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल, बैटरी और एनक्लोजर जैसे पार्ट्स के उपयोग पर 1.5% का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

PLI के बाद नया चरण: भारतीय ब्रांड्स को मिलेगा बढ़ावा

MPMS योजना को पहले से चल रही ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) योजना के अगले उन्नत चरण के रूप में देखा जा रहा है।
जहां PLI का मुख्य उद्देश्य भारत में उत्पादन का वॉल्यूम बढ़ाना था, वहीं MPMS का लक्ष्य भारत में वैल्यू एडिशन (Value Addition) को बढ़ाना है। इसके तहत भारतीय स्वामित्व वाले ब्रांड्स को अपने खुद के डिजाइन, बौद्धिक संपदा (IP) और R&D विकसित करने के लिए 3% अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: MPMS योजना का कुल बजट कितना है?
उत्तर: इस योजना के लिए सरकार ने ₹62,500 करोड़ का बजटीय आवंटन मंजूर किया है।
Q2: यह योजना किस अवधि के लिए लागू की गई है?
उत्तर: MPMS योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक 5 वर्षों के लिए लागू रहेगी।
Q3: क्या MPMS योजना से घरेलू कंपनियों को कोई विशेष लाभ मिलेगा?
उत्तर: हां, भारतीय ब्रांड्स जो खुद के डिजाइन और R&D पर काम करेंगे, उन्हें 3% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा स्थानीय पार्ट्स खरीदने वाली कंपनियों को भी 1.5% का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
Disclaimer:
यह लेख सामान्य जानकारी और केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के आधार पर तैयार किया गया है। योजना की विस्तृत शर्तों, नियमों और आवेदन प्रक्रिया के लिए आधिकारिक सरकारी पोर्टल या MeitY के दिशानिर्देश देखें।

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