‘झुकूंगा नहीं’ कहने वाले टीएमसी नेता जहांगीर खान नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार, कलकत्ता हाई कोर्ट से मिला था झटका

कोलकाता । सोमवार, 8 जून 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने बयानों और चुनावी विवादों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता जहांगीर खान आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गए हैं। बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें भारत-नेपाल सीमा (Nepal Border) के पास से दबोच लिया। चुनावी नतीजों के बाद से ही जहांगीर खान फरार चल रहे थे और पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई थी।

चुनावी नतीजों के बाद दर्ज हुए थे मुकदमे

जहांगीर खान दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस सीट पर ईवीएम (EVM) के साथ छेड़छाड़ और मतदाताओं को डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद चुनाव आयोग को यहां दोबारा मतदान (Repoll) कराने के आदेश देने पड़े थे। भारी दबाव और विवादों के बीच जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर री-पोलिंग से दो दिन पहले अपना नामांकन वापस ले लिया था।

बीते 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, फलता पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ चुनावी हिंसा, धांधली और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे। नवीनतम जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ कुल 7 एफआईआर (FIR) दर्ज हैं, जिनमें से 5 मामले चुनावी नतीजों के ठीक बाद दर्ज किए गए थे।

खुद को बताया था ‘पुष्पा’, आईपीएस अजय पाल शर्मा से था टकराव

चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान का एक बयान बेहद वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने फिल्मी अंदाज में खुद की तुलना ‘पुष्पा’ किरदार से करते हुए मंच से दहाड़ा था कि “वह पुष्पा हैं और किसी के आगे झुकेंगे नहीं।”

इसके अलावा, चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की कमान संभाल रहे उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस (IPS) अधिकारी अजय पाल शर्मा और जहांगीर खान के बीच का टकराव भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ था। जहांगीर खान ने पुलिस प्रशासन और सुरक्षा बलों को खुलेआम चुनौतियां दी थीं, जिसने राज्य में बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद को जन्म दिया था।

कोर्ट से झटका मिलते ही एसटीएफ ने कसा शिकंजा

जहांगीर खान ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अंतरिम सुरक्षा (गिरफ्तारी पर रोक) बढ़ाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, कोर्ट ने उनके खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया और उनकी अंतरिम सुरक्षा याचिका को खारिज कर दिया।

सुरक्षा कवच हटते ही एसटीएफ ने तकनीकी सर्विलांस और जमीनी खुफिया तंत्र की मदद से उनकी लोकेशन को ट्रैक किया। पता चला कि वे कानूनी शिकंजे से बचने के लिए नेपाल भागने की फिराक में थे। इससे पहले कि वे सीमा पार कर पाते, एसटीएफ की मुस्तैद टीम ने उन्हें बॉर्डर एरिया से धर दबोचा।

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