जबरन धर्मांतरण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का सख्त रुख: आरोपी हेमराज टेलर की याचिका खारिज, चलेगा ट्रायल

Saransh Kanaujia
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भोपाल | शुक्रवार, 8 मई 2026

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में धार्मिक स्वतंत्रता और जबरन धर्मांतरण के एक गंभीर मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी हेमराज टेलर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसके खिलाफ दर्ज FIR और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस संदीप एन. भट्टी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले के तथ्य प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और इसकी पूरी जांच ट्रायल के माध्यम से ही संभव है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के जीरापुर थाने का है (अपराध क्रमांक 481/2023)। आरोपी हेमराज टेलर पर आरोप है कि उसने एक हिंदू परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया। शिकायत के अनुसार, परिवार को न केवल धर्म बदलने के लिए उकसाया गया, बल्कि इनकार करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप एन. भट्टी ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य, विशेष रूप से पीड़ित के नाबालिग बेटे के बयान, आरोपी की भूमिका की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं। कोर्ट ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • न्यायिक हस्तक्षेप का अभाव: जब आरोपों में पर्याप्त आधार नजर आ रहे हों, तो हाई कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग करके FIR रद्द नहीं कर सकता।

  • साक्ष्यों की जांच: आरोपी द्वारा किए गए दावों की सच्चाई और गवाहों के बयानों की सत्यता का परीक्षण ट्रायल (विवाद के दौरान) में ही किया जा सकता है।

  • समान अवसर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को ट्रायल के दौरान अपना पक्ष रखने और गवाहों से जिरह (Cross-examination) करने का पूरा अवसर मिलेगा।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम का प्रभाव

यह कार्रवाई मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 के तहत की गई है। यह कानून राज्य में किसी भी व्यक्ति को भय, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने से रोकता है।

  • धारा 3: किसी भी व्यक्ति का जबरन या कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण करना प्रतिबंधित करती है।

  • धारा 5: उल्लंघन की स्थिति में कारावास (जो कि कुछ मामलों में 10 वर्ष तक हो सकता है) और जुर्माने का प्रावधान करती है।

निष्कर्ष

हाई कोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्तिगत है और किसी को भी इसे जबरन बदलने का अधिकार नहीं है। अब इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी, जहाँ हेमराज टेलर को आरोपों का सामना करना पड़ेगा।

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