मिडिल-ईस्ट में टला महाविनाश! ट्रंप ने दी ‘सभ्यता मिटाने’ की धमकी, फिर 2 हफ्ते के युद्धविराम पर बनी सहमति

Saransh Kanaujia
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वाशिंगटन | बुधवार, 8 अप्रैल 2026

दुनिया एक बार फिर तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने से वापस लौट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी घोषित डेडलाइन खत्म होने से महज 120 मिनट पहले ईरान पर होने वाली विनाशकारी बमबारी को 14 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि वे अस्थायी ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) पर सहमत हो गए हैं, जिसमें इजरायल भी शामिल है।

‘सभ्यता मिटाने’ की चेतावनी और आखिरी मिनट का ड्रामा

मंगलवार रात 8 बजे (अमेरिकी समय) की डेडलाइन तय करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो “पूरी सभ्यता तबाह हो जाएगी।” उन्होंने ईरान के बिजली घरों, पुलों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह जमींदोज करने का आदेश दे दिया था। हालांकि, समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता ने रंग दिखाया और ‘विनाशकारी बल’ को रोक लिया गया।

युद्धविराम की 3 सबसे बड़ी शर्तें

इस समझौते को ट्रंप ने “निर्णायक शांति की दिशा में कदम” बताया है, लेकिन यह कुछ कड़े प्रतिबंधों के साथ आता है:

  1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान को इस वैश्विक तेल मार्ग को “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” रूप से व्यापार के लिए खोलना होगा।

  2. 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव: ईरान ने अमेरिका को एक गोपनीय 10-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। ट्रंप के अनुसार, यह बातचीत के लिए एक “व्यवहारिक आधार” है और अगले दो हफ्तों में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

  3. द्विपक्षीय रोक: यह हमला केवल अमेरिका नहीं रोकेगा, बल्कि ईरान और इजरायल भी एक-दूसरे पर हमले बंद करने पर सहमत हुए हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: शहबाज और मुनीर का रोल

ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि यह सफलता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ हुई गहन बातचीत का परिणाम है। पाकिस्तानी नेतृत्व ने ट्रंप से अनुरोध किया था कि कूटनीति को एक आखिरी मौका दिया जाए। रिपोर्टों के अनुसार, अब शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता शुरू हो सकती है।

क्या शांति स्थायी होगी?

व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, इजरायल ने भी इस शर्त पर सहमति जताई है कि जब तक बातचीत जारी रहेगी, वे बमबारी नहीं करेंगे। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका ने अपने अधिकांश सैन्य उद्देश्य पहले ही हासिल कर लिए हैं, इसलिए अब वे “दीर्घकालिक शांति” चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है: यह 14 दिन का समय दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यदि ईरान होर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई बहाल कर देता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है, जो युद्ध की आहट से आसमान छू रही थीं।

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