कानपुर पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी: 3200 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड महफूज आलम गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
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कानपुर | गुरुवार, 7 मई 2026  

कानपुर के जाजमऊ निवासी महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी, जो पिछले दो महीनों से पुलिस को चकमा दे रहा था, आखिरकार सलाखों के पीछे पहुँच गया है। सूत्रों के अनुसार, फरारी के दौरान महफूज पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक TMC (तृणमूल कांग्रेस) नेता की शरण में छिपा हुआ था।

हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद जब वहां राजनीतिक समीकरण बदले, तो महफूज ने खुद को बचाने के लिए कानपुर के कुछ मुखबिरों से संपर्क साधा। पुलिस की बिछाई गई जाल में फंसकर वह बुधवार को कानपुर पहुँचा, जहाँ पुलिस ने घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। उसे आज (गुरुवार) अदालत में पेश कर जेल भेजा जाएगा।

कैसे खुला 3200 करोड़ का यह काला चिट्ठा?

इस पूरे घोटाले की शुरुआत 16 फरवरी को हुई एक मामूली लूट से हुई थी। श्याम नगर चौकी के पास वासिद और अरशद नाम के दो युवकों से 24 लाख रुपये की लूट हुई थी। जब पुलिस ने जांच की तो पता चला कि ये दोनों युवक महफूज आलम के लिए काम करते थे।

पुलिस ने जब महफूज के बैंक खातों की जांच शुरू की, तो उनके होश उड़ गए। शुरुआती जांच में जो आंकड़ा 1600 करोड़ था, वह अब बढ़कर 3200 करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया है। यह सारा पैसा 16 बैंकों के 100 से ज्यादा फर्जी खातों के जरिए घुमाया गया था।

भोले-भाले गरीबों को बनाया ‘करोड़पति’ मोहरा

महफूज का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वह कबाड़ियों, पेंटरों और मजदूरों को बैंक लोन दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज (पैन और आधार) ले लेता था।

  • आरती इंटरप्राइजेज: एक मजदूर महिला आरती के नाम पर फर्म बनाकर 100 करोड़ का लेनदेन किया।

  • राजा इंटरप्राइजेज: शहनवाज नाम के व्यक्ति के फर्जी दस्तावेज बनाकर 64.44 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया।

  • अजय शुक्ला (कबाड़ी): इनके नाम पर ‘मां विंध्यवासिनी इंटरप्राइजेज’ बनाकर 21 करोड़ घुमाए गए।

  • निखिल कुमार (पेंटर): इनके नाम पर 7.75 करोड़ का फर्जी लेनदेन हुआ।

ED, IT और टेरर फंडिंग का एंगल

इतनी बड़ी रकम का हवाला और स्लॉटर हाउस से जुड़े होने के कारण अब इस मामले में केंद्रीय एजेंसियां भी कूद पड़ी हैं:

  1. ED (प्रवर्तन निदेशालय): मनी लॉन्ड्रिंग के तहत खातों को फ्रीज कर रही है।

  2. IT (आयकर विभाग): बेनामी संपत्तियों की जांच कर रहा है।

  3. NIA/Security Agencies: पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस विशाल धनराशि का उपयोग टेरर फंडिंग या देश विरोधी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया जा रहा था।

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