मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का बड़ा फैसला: रूस से जारी रहेगा सस्ता तेल आयात

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा नीति पर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। केंद्र सरकार ने शनिवार को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और रूस से किफायती दरों पर कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा।

अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई का असर

हाल ही में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में हालात विस्फोटक हो गए हैं। दुनिया भर के तेल बाजारों में आपूर्ति ठप होने की आशंका जताई जा रही थी, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के रूसी तेल आयात को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, जिस पर भारत ने अपनी संप्रभुता का परिचय देते हुए करारा जवाब दिया है।

सरकार का रुख: “हमें किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं”

भारत सरकार के प्रवक्ता ने प्रेस वार्ता में साफ कहा:

“भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और हम अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ही तेल की खरीद करते हैं। हमें दुनिया के किसी भी देश से ऊर्जा संसाधनों की खरीद के लिए किसी अन्य देश की मंजूरी या अनुमति की आवश्यकता नहीं है। जहाँ भी हमें सस्ती और स्थिर कीमतों पर तेल मिलेगा, हम उसे खरीदना जारी रखेंगे।”

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि अमेरिका से रूस के संदर्भ में कुछ ‘अस्थायी छूट’ की चर्चा है, लेकिन भारत का तेल आयात कभी भी किसी बाहरी अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है।

भारत की ‘प्लान-बी’ रणनीति: आपूर्ति का विविधीकरण

किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है:

  • स्रोतों में विस्तार: भारत अब केवल 27 देशों के बजाय 40 देशों से तेल खरीद रहा है।

  • रूस नंबर 1 सप्लायर: फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, तमाम प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

  • रिफाइनिंग पावर: भारत की वर्तमान रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो घरेलू मांग से कहीं अधिक है।

संकट के लिए पर्याप्त ‘बफर’ स्टॉक

घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत ने अपना खजाना भरा हुआ है। वर्तमान में भारत के पास 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल का भंडार है। यह स्टॉक देश की तेल की जरूरतों को लगभग 7 से 8 हफ्तों तक बिना किसी बाहरी मदद के पूरा कर सकता है।

बाजार विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज रूट पर तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में रूस से मिल रहा ‘डिस्काउंटेड तेल’ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जिससे आम जनता को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है।

अर्थव्यवस्था: new.matribhumisamachar.com/business

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