समाज को सिखाने का सबसे प्रभावी माध्यम स्वयं का आचरण है – शांताक्का जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस संघ शताब्दी वर्ष

सिवनी. मिशन स्कूल, सिवनी प्रांगण में पथ संचलन से पूर्व बौद्धिक सत्र में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शान्ताक्का जी ने कहा कि जीवन का कार्य दक्षता के साथ योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए। हमारा आचार और विचार लोगों के लिए आदर्श होना चाहिए। समाज के समस्त लोगों के साथ समरसता जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक घंटे की नियमित शाखा में दिए जाने वाले संस्कार से व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषि-मुनियों ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” का विचार दिया। यह केवल भाषणों से नहीं, बल्कि नित्य शाखा के अभ्यास से आचरण में उतरता है। समाज को सिखाने का सबसे प्रभावी माध्यम स्वयं का आचरण है। हमें हमारी प्राचीन धर्म संस्कृति को आचरण में लाना आवश्यक है।

उहोंने कहा कि भारत पर हजारों आक्रमण हुए, उसके बावजूद भी हमारे पूवजों ने धर्म-संस्कृति को बचाकर रखा और भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों की रक्षा में नारी शक्ति का बड़ा योगदान है। आज आवश्यकता है कि नारी अपनी आंतरिक शक्ति को पहचाने और “नारी से नारायणी” बनने का संकल्प ले।

प्रकृति ने नारी को देवप्रदत्त वरदान दिए हैं। शिवाजी महाराज, बालगंगाधर तिलक, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के निर्माण के पीछे उनकी माताओं का अमूल्य योगदान रहा है। नारी का कर्तव्य केवल परिवार नहीं, बल्कि समाज निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाना भी है। निःस्वार्थ सेवा, त्याग और सहनशीलता – यही नारी से नारायणी बनने का मार्ग है।

शान्ताक्का जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी से अमेरिका में किसी ने भारतीय नारी के सबन्ध में पूछा कि वे कैसी है तो उन्होंने कहा था – भारतीय नारी अद्वितीय है, वह निःस्वार्थ प्रेम देने वाली, कष्ट सहन करते हुए भी सभी को साथ लेकर चलने वाली है।

आज की नारी इंजीनियरिंग, डॉक्टर, सेना, मीडिया सभी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व करना, मंगलयान में भागीदारी जैसे अनेक उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि नारी को सुशीला, सुधीरा, समर्था होना चाहिए। जिससे वह स्वयं के साथ-साथ पूरे परिवार और समाज को एक रख सकती है और किसी परिस्थिति में संगठित और सुरक्षित कर सकती है।

उन्होंने कहा कि “कदम से कदम मिलाकर चलना सिर्फ पथ संचलन नहीं, एक ही दिशा में एक ही विचार और आत्मीयता के साथ चलना संगठन की मूल भावना को प्रदर्शित करता है और यही अपने व्यक्तिगत जीवन में उतारना उसकी सार्थकता है।”

बौद्धिक सत्र में अथिति के रूप में उदय पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर संगीता मालू ने भी अपने विचार रखे। तत्पश्चात ध्वज के नेतृत्व में घोष के साथ कदमताल मिलाते हुए, सेविकाओं ने पथ संचलन में सहभागिता की। सम्पूर्ण मार्ग में जगह-जगह पर पुष्पवर्षा कर नागरिकों ने सेविकाओं का उत्साहवर्धन किया।

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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