कर्ज के बोझ तले पाकिस्तान: 50 साल बाद फिर शुरू किया शराब का निर्यात, आर्थिक संकट से उबरने की जद्दोजहद

Saransh Kanaujia
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इस्लामाबाद । मंगलवार, 5 मई 2026

आर्थिक बदहाली और $138$ अरब डॉलर के भारी विदेशी कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। देश की सबसे पुरानी और इकलौती स्थानीय शराब निर्माता कंपनी, मरी ब्रूअरी (Murree Brewery) ने करीब पांच दशकों के अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में शराब का निर्यात (Export) फिर से शुरू कर दिया है।

अप्रैल 2026 में कंपनी ने अपनी पहली खेप ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को भेजी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पाकिस्तान को अपने कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए विदेशी मुद्रा की सख्त जरूरत है।

OIC देशों को छोड़कर दुनिया भर में सप्लाई

कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के अनुसार, सरकार ने 2025 में शराब निर्यात के लिए विशेष अनुमति दी थी। हालांकि, एक शर्त यह रखी गई है कि यह निर्यात केवल उन देशों को किया जाएगा जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं। फिलहाल कंपनी विदेशी बाजारों में अपना नेटवर्क मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, ताकि भविष्य में उत्पादन को और बढ़ाया जा सके।

पाकिस्तान का आर्थिक गणित: आय कम, कर्ज ज्यादा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी चिंताजनक है:

  • कुल विदेशी कर्ज: लगभग $138$ अरब डॉलर (38,640 अरब PKR)।

  • सरकारी आय: $40$ अरब डॉलर, जबकि खर्च $58$ अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

  • ब्याज का बोझ: पाकिस्तान अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा, यानी करीब $30$ अरब डॉलर (8,200 अरब PKR), सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च कर रहा है।

इतिहास: भुट्टो का प्रतिबंध और जिया-उल-हक की सख्ती

पाकिस्तान में शराब का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1977 तक पाकिस्तान में शराब की बिक्री आम थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने कट्टरपंथी ताकतों के दबाव में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक ने इसे इस्लामिक कानूनों से जोड़कर और भी सख्त बना दिया।

तथ्य:

सालों तक ‘मरी ब्रूअरी’ केवल गैर-मुस्लिमों और विदेशियों को परमिट पर शराब बेचती थी। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने जूस और मिनरल वाटर जैसे ‘नॉन-अल्कोहलिक’ उत्पादों से अपनी पहचान बनाई और पिछले वित्त वर्ष में $100$ मिलियन डॉलर की कमाई की। लेकिन अब, आर्थिक दबाव ने सरकार को निर्यात नीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

प्रतिबंध का विपरीत असर: हेरोइन का बढ़ता नशा

जानकारों का मानना है कि 1970 के दशक में लगाए गए शराब प्रतिबंध का एक काला पक्ष यह भी रहा कि देश में सिंथेटिक ड्रग्स और हेरोइन का चलन बढ़ गया। आंकड़ों के अनुसार, 1979 में जहां हेरोइन के इक्का-दुक्का मामले थे, वहीं 1985 तक पाकिस्तान दुनिया के सबसे बड़े हेरोइन खपत वाले देशों में शामिल हो गया था।

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