नई दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संसद की महत्वपूर्ण विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges) के लिए नए सदस्यों की नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा की। वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति का नया कार्यकाल 3 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गया है।
समिति की संरचना और प्रमुख सदस्य
संसदीय कार्यप्रणाली में संतुलन बनाए रखने के लिए इस 15 सदस्यीय समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अनुभवी सांसदों को जगह दी गई है। समिति के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:
-
भाजपा: ब्रिजमोहन अग्रवाल, रामवीर सिंह बिधुरी, संगीता कुमारी सिंह देव, जगदंबिका पाल, त्रिवेंद्र सिंह रावत और जगदीश शेट्टर।
-
कांग्रेस: तारिक अनवर, माणिकम टैगोर बी और मनीष तिवारी।
-
अन्य दल: टीआर बालू (द्रमुक), कल्याण बनर्जी (एआईटीसी), श्रीरंग अप्पा चंदू बारने (शिवसेना), अरविंद गणपत सावंत (शिवसेना-यूबीटी) और धर्मेंद्र यादव (सपा)।
क्या है इस समिति की भूमिका?
विशेषाधिकार समिति का मुख्य कार्य सदन की गरिमा और सांसदों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। यह समिति:
-
संसदीय विशेषाधिकारों के उल्लंघन और सदन की अवमानना से जुड़ी शिकायतों की जांच करती है।
-
लोकसभा नियम 227 के तहत अध्यक्ष द्वारा भेजे गए मामलों पर विचार कर अपनी सिफारिशें सौंपती है।
-
दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का सुझाव देती है।
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में जांच समिति का पुनर्गठन
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, लोकसभा अध्यक्ष ने जस्टिस यशवंत वर्मा के निष्कासन के आधारों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष समिति का भी पुनर्गठन किया है।
पृष्ठभूमि: पिछले वर्ष जस्टिस वर्मा के आवास पर कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के आरोपों के बाद यह मामला चर्चा में आया था। इस घटना ने देश में एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी थी।
पुनर्गठित जांच समिति 6 मार्च, 2026 से अपना कार्यभार संभालेगी और मामले की विस्तृत पड़ताल कर अपनी अंतिम रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि इन समितियों का पुनर्गठन विधायी और न्यायिक शुचिता को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
