डिजिटल मूल्यांकन की जल्दबाजी पड़ी भारी: सीबीएसई चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर; संसदीय समिति में छात्र ने खोली पोल

नई दिल्ली | बुधवार, 3 जून 2026

देश की सबसे बड़ी माध्यमिक परीक्षा संस्था, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में इस समय एक अभूतपूर्व प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणामों के बाद शुरू हुआ सीबीएसई ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद 2026 अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। छात्रों के बढ़ते आक्रोश और व्यापक गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद, केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और बोर्ड सचिव हिमांशु गुप्ता का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है।

इतना ही नहीं, इस पूरे डिजिटल मूल्यांकन तंत्र की खरीद प्रक्रिया और तकनीकी खामियों की जांच के लिए कैबिनेट सचिवालय ने एक उच्च स्तरीय एक-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसकी कमान क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की प्रमुख एस. राधा चौहान को सौंपी गई है।

संसदीय समिति की बैठक में लगी अधिकारियों की क्लास

इस प्रशासनिक फेरबदल से ठीक पहले शिक्षा मंत्रालय की संसद की स्टैंडिंग कमेटी (संसदीय स्थायी समिति) की बैठक में बेहद हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। कमेटी के अध्यक्ष और वरिष्ठ सांसद दिग्विजय सिंह ने पूर्व सीबीएसई चेयरमैन और स्कूल शिक्षा सचिव को तलब कर तीखे सवालों की बौछार कर दी।

समिति ने सबसे बड़ा सवाल इस बात पर उठाया कि आखिर बिना किसी व्यापक पायलट प्रोजेक्ट या कॉपियां जांचने वाले शिक्षकों (Evaluators) को उचित प्रशिक्षण दिए, इस नई प्रणाली को लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? दिग्विजय सिंह ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा:

“क्या पूरी तैयारी के साथ इसे एक साल बाद लागू नहीं किया जा सकता था? इस तरह की हड़बड़ी का सीधा मतलब यह है कि आपने लाखों बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा दिया। मुझे इन सभी कमियों पर लिखित में जवाब चाहिए।”

बैठक में जब एक छात्र बन गया “असिस्टेंट”

इस संसदीय बैठक की सबसे अनोखी बात यह रही कि इसमें केवल अधिकारियों की दलीलें नहीं सुनी गईं, बल्कि पीड़ित छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक कक्षा 12वीं के छात्र (सार्थक सिद्धांत) को भी गवाही के लिए बुलाया गया था।

उस छात्र ने सीबीएसई चेयरमैन और सेक्रेटरी के सामने ही प्रजेंटेशन देकर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल की उन बुनियादी और तकनीकी कमियों को उजागर कर दिया, जिसे बोर्ड के अधिकारी अब तक ‘सब कुछ ठीक है’ कहकर टाल रहे थे। छात्र की इस सूझबूझ को देखकर भाजपा सांसद भीम सिंह ने अधिकारियों की चुटकी लेते हुए तंज कसा:

“अगर यह सिस्टम संभालना आपके बस का नहीं था, तो कम से कम इस होनहार छात्र को ही अपना असिस्टेंट बना लीजिए। यह आपका काम बहुत आसान कर देगा।”

क्या था ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) विवाद?

इस साल सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए प्रारंभिक कागजी कॉपियों के बजाय डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (OSM) को बड़े पैमाने पर लागू किया था। इसके तहत हैदराबाद की एक निजी वेंडर कंपनी (कोएम्प्ट एडुटेक) को उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करने और उन्हें स्क्रीन पर जांचने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। लेकिन परिणाम आते ही देश भर के 17 लाख से अधिक घरों में हड़कंप मच गया।

छात्रों और अभिभावकों द्वारा सामने लाई गईं कुछ मुख्य विसंगतियां इस प्रकार हैं:

  • धुंधली और अस्पष्ट स्कैनिंग: छात्रों को पोस्ट-रिजल्ट वेरिफिकेशन में जो कॉपियां मिलीं, उनमें कई पन्ने इतने धुंधले (Blurred) थे कि उन पर लिखा एक अक्षर भी पढ़ पाना नामुमकिन था। इसके बावजूद परीक्षकों ने उन पर टिक लगाकर मनमाने नंबर दे दिए थे।

  • मिसमैच और अदला-बदली: लगभग 23 से अधिक ऐसे गंभीर मामले सामने आए जहां एक छात्र के रोल नंबर पर किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका अपलोड कर दी गई थी।

  • सुरक्षा और डेटा गोपनीयता में चूक: हाल ही में 19 वर्षीय एक एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने बोर्ड के ‘ऑनमार्क’ (OnMark) पोर्टल में गंभीर सुरक्षा खामियां उजागर की थीं, जिसमें छात्रों का संवेदनशील डेटा और उत्तर पुस्तिकाएं बिना किसी कड़े ऑथेंटिकेशन के अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) के पब्लिक बकेट में असुरक्षित पाई गईं।

इन तकनीकी खामियों का सीधा असर नतीजों पर पड़ा और इस साल सीबीएसई 12वीं का पास प्रतिशत गिरकर 85.20% पर आ गया, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम है। कई होनहार छात्र जो जेईई (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल रहे, वे बोर्ड के मुख्य विषयों में फेल या बेहद कम अंक पाकर रह गए।

अब आगे क्या? सुधार के लिए उठाए जा रहे कदम

सरकार और बोर्ड ने अब चौतरफा दबाव के बाद डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) शुरू कर दिया है:

  1. एक महीने में आएगी जांच रिपोर्ट: एस. राधा चौहान की अध्यक्षता वाली समिति इस बात की जांच करेगी कि इस निविदा (Tender) को आवंटित करने में नियमों को कितना शिथिल किया गया था। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

  2. री-इवैल्यूएशन पोर्टल खुला: सीबीएसई ने छात्रों के भारी विरोध को देखते हुए 2 जून 2026 से अपने पोस्ट-रिजल्ट एक्टिविटी पोर्टल को दोबारा सक्रिय कर दिया है। प्रभावित छात्र 6 जून 2026 की मध्यरात्रि तक अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने फीस को भी कम करके प्रति प्रश्न ₹25 और प्रति कॉपी ₹100 कर दिया है।

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