ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाए लश्कर और जैश; ईद पर ‘कुर्बानी की खालों’ से जुटाए ₹80 करोड़, हमास से भी जुड़े तार

श्रीनगर । मंगलवार, 2 जून 2026

भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी कमर टूट जाने के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) एक बार फिर अपने नेटवर्क को खड़ा करने की पुरज़ोर कोशिशों में जुट गए हैं। खुफिया एजेंसियों से मिले हालिया इनपुट के अनुसार, वित्तीय संकट से जूझ रहे इन दोनों आतंकी संगठनों ने हाल ही में संपन्न हुई ईद-उल-जुहा (बकरीद) के अवसर पर कश्मीर में हिंसा फैलाने के नाम पर लगभग करोड़ों रुपये का नकद चंदा और तकरीबन 80 करोड़ रुपये मूल्य की कुर्बानी की खालें अवैध रूप से इकट्ठा की हैं।

वैश्विक स्तर पर लगी पाबंदियों (FATF Sanctions) और भारतीय सेना की आक्रामक कार्रवाई के कारण इन संगठनों का पारंपरिक वित्तीय तंत्र (Terror Funding Network) पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था, जिसे दोबारा सक्रिय करने के लिए अब जनभावनाओं और धार्मिक अवसरों का सहारा लिया जा रहा है।

मुखौटा संगठनों (Front NGOs) का लिया सहारा

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, सीधे तौर पर चंदा इकट्ठा करने पर लगी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से बचने के लिए दोनों आतंकी गुटों ने अपने कथित चैरिटी विंग्स और स्थानीय मौलवियों का सहारा लिया:

  • जैश-ए-मोहम्मद (JeM): इसने चंदा और खालें जुटाने के लिए अल रहमत ट्रस्ट, अल अख्तर ट्रस्ट और जमात-उल-मोमिनात जैसे छद्म बैनरों का इस्तेमाल किया। कराची और उसके आसपास के इलाकों से ही इस संगठन ने लाखों रुपये की खालें बटोरीं।

  • लश्कर-ए-तैयबा (LeT): लश्कर के मुखौटा संगठनों फलाह-ए-इंसानियत ट्रस्ट (FIF) और अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक ने पूरे पाकिस्तान में स्टॉल लगाकर और घर-घर जाकर कुर्बानी की खालें जमा कीं।

आमतौर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा दान की जाने वाली इन खालों का इस्तेमाल चमड़ा उद्योग (Leather Industry) में होता है, जिससे बड़ी मात्रा में नकदी हासिल होती है। आतंकियों का इरादा इस काली कमाई का इस्तेमाल कश्मीर घाटी में निर्दोषों का खून बहाने और नए लड़कों की भर्ती करने के लिए करने का है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की मार से उपजी छटपटाहट

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना और वायुसेना ने कुछ समय पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था। इस अचूक सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान और पीओके (PoK) के अंदर स्थित जैश के बहावलपुर मुख्यालय (मरकज सुभान अल्लाह) और लश्कर के मुरीदके स्थित ‘मरकज तयबा’ सहित 9 बड़े आतंकी अड्डों और लॉन्च पैड्स को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया गया था।

इस प्रहार में 100 से अधिक खूंखार आतंकी और उनके शीर्ष कमांडर मारे गए थे। इस तबाही के बाद उनके पास हथियारों, रसद और नए कैंप बनाने के लिए पैसों की भारी किल्लत हो गई है, जिसकी भरपाई के लिए वे इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

जैश और हमास का खतरनाक वैश्विक गठजोड़

इस खुफिया रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद ने कथित तौर पर इस बार ईद के मौके पर फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास (Hamas) को 5 करोड़ रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) की वित्तीय मदद भेजी है।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दोनों संगठनों के बीच यह रणनीतिक और वित्तीय सहयोग बेहद खतरनाक है। पिछले दिनों जैश की रैलियों में हमास के कमांडरों की अप्रत्यक्ष मौजूदगी और अब यह फंड ट्रांसफर साफ संकेत देता है कि ये वैश्विक आतंकी नेटवर्क भारत के खिलाफ एक बड़ी और साझी साजिश रचने की फिराक में हैं।

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