बजट सत्र में चीन पर संग्राम: राहुल गांधी के आरोपों पर अमित शाह और राजनाथ सिंह का तीखा पलटवार

नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र का आज का दिन जबरदस्त हंगामे और तीखी राजनीतिक बहस का गवाह बना। लोकसभा में चीन और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए डोकलाम और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में कथित चीनी घुसपैठ का मामला उठाया। उनके आरोपों के जवाब में सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आक्रामक रुख अपनाया।

राहुल गांधी का हमला: “सरकार देश को अंधेरे में रख रही है”

लोकसभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि चीन सीमा पर स्थिति को लेकर सरकार पूरी सच्चाई सामने नहीं ला रही है। उन्होंने दावा किया कि डोकलाम और लद्दाख के कुछ इलाकों में चीन लगातार सैन्य और बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है, जो भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।

राहुल गांधी ने तीन अहम मुद्दे उठाए:

  • डोकलाम विवाद: चीन द्वारा स्थायी सैन्य ढांचे का निर्माण भारत की सामरिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।
  • रक्षा बजट पर सवाल: बदलते वैश्विक हालात और चीन की आक्रामक नीति के बावजूद रक्षा बजट में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई।
  • पारदर्शिता की मांग: सरकार को वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर वास्तविक स्थिति देश को स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

राजनाथ सिंह का पलटवार: “सेना के शौर्य पर सवाल न उठाएं”

राहुल गांधी के आरोपों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और बीते वर्षों में सीमावर्ती इलाकों में अभूतपूर्व बुनियादी ढांचा विकास हुआ है।

राजनाथ सिंह ने कहा,

  • पिछले एक दशक में सीमा क्षेत्रों में सड़कों, पुलों और सुरंगों का नेटवर्क तेजी से बढ़ाया गया है।
  • डोकलाम और गलवान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय सेना ने साहस और दृढ़ता के साथ हर चुनौती का जवाब दिया है।

उन्होंने विपक्ष से अपील की कि सेना के मनोबल को कमजोर करने वाले बयान देने से बचा जाए।

अमित शाह का तीखा वार: “1962 का इतिहास न भूलें”

गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग 1962 के इतिहास को भूल जाते हैं, वे आज राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भारत की एक इंच जमीन पर भी कोई बाहरी ताकत कब्जा नहीं कर सकती।

अमित शाह ने कहा,
“हम संसद में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना तथ्य और आधार के आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते।”
उन्होंने यह भी तंज कसा कि पिछली सरकारों की नीतियों के कारण ही आज कुछ जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित

तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बाद विपक्ष ने सरकार से जवाब की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। हालात बिगड़ते देख लोकसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी से अपने बयानों पर माफी की मांग करते हुए कहा कि सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

बजट सत्र के इस हंगामेदार दिन ने साफ कर दिया है कि चीन और सीमा सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद की बहस का केंद्र बना रहेगा। एक ओर विपक्ष सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार सेना की मजबूती और अपनी नीतियों पर भरोसा जताते हुए किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर रही है।

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