राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच: योगी सरकार ने SIT को दिया 15 दिन का अतिरिक्त समय, अब मनी ट्रेल पर मुख्य फोकस

लखनऊ बुधवार, 1 जुलाई 2026

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे की चोरी से जुड़े मामले में आज एक बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है।

अब एसआईटी को 15 जुलाई 2026 तक अपनी विस्तृत और साक्ष्य-आधारित रिपोर्ट सरकार के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। शासन स्तर पर लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य जांच के दायरे को और अधिक व्यापक बनाना है ताकि आस्था के केंद्र से जुड़ी इस बड़ी साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश हो सके।

जांच का दायरा हुआ व्यापक: केवल नकद नहीं, अब डिजिटल रिकॉर्ड पर नजर

शुरुआती दौर में यह मामला केवल कथित नकद राशि के गबन से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा था, लेकिन सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब जांच की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार के नए निर्देशों के बाद SIT अब निम्नलिखित कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है:

  1. गहन मनी ट्रेल (Money Trail): जांच दल अब इस बात का गहराई से पता लगा रहा है कि दानपात्र से गायब की गई करोड़ों रुपये की राशि किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।

  2. डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: मंदिर परिसर और काउंटिंग सेंटर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, संदिग्धों के मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल्स और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है।

  3. संगठित नेटवर्क की आशंका: क्या इस पूरी चोरी के पीछे मंदिर प्रबंधन, बैंक कर्मचारियों या बाहरी लोगों का कोई बड़ा और संगठित गिरोह (Organized Network) शामिल है? जांच एजेंसियां इस बिंदु पर विशेष फोकस कर रही हैं।

आरोपियों की बढ़ी मुश्किलें: जेल में पूछताछ पूरी, अब कस्टडी की तैयारी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) के तहत जेल में बंद हैं। जांच टीम ने मुख्य आरोपी से जेल के भीतर पूछताछ का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

आगे का कदम: SIT अब न्यायालय से आवश्यक कानूनी अनुमति लेकर आरोपियों की पुलिस कस्टडी (Police Custody) प्राप्त करने की तैयारी में है। कस्टडी मिलने के बाद सभी आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाएगी, जिससे इस वित्तीय अनियमितता के कई छिपे हुए राज उजागर होने की उम्मीद है।

सरकार का सख्त रुख: निष्पक्षता से होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अतिरिक्त समय देने का मूल उद्देश्य यही है कि अंतिम रिपोर्ट पूरी तरह से वैज्ञानिक, तकनीकी और पुख्ता वित्तीय प्रमाणों पर आधारित हो, ताकि न्यायालय में दोषियों के खिलाफ मामला कमजोर न पड़े।

फिलहाल, 1 जुलाई 2026 को इस मामले में किसी नई गिरफ्तारी या नई एफआईआर (FIR) दर्ज होने की आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, जांच का दायरा बढ़ने और समय-सीमा 15 जुलाई तक विस्तारित होने के बाद आने वाले दिनों में कुछ बड़े चेहरों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *