भगवान राम पर टिप्पणी मामला: MP-MLA कोर्ट ने राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी, फैसला रखा सुरक्षित

वाराणसी । सोमवार, 1 जून 2026

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान श्री राम को लेकर दिए गए उनके कथित बयान के मामले में सोमवार को वाराणसी की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (अपर जिला जज कोर्ट संख्या पंचम) में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान लगातार तीन बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी राहुल गांधी या उनकी तरफ से किसी वकील के उपस्थित न होने पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताई है।

विशेष न्यायाधीश यजुर्वेद विक्रम सिंह ने राहुल गांधी के इस रुख को बेहद “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया और कोर्ट की अवमानना की बात कही। अदालत ने राहुल गांधी के पक्ष की सुनवाई को आज पूरा मानते हुए इस पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) पर अपना फैसला सुरक्षित (Order Reserved) रख लिया है।

क्या है पूरा मामला और विवादित बयान का सच?

यह पूरा विवाद राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा है। वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर यह दावा किया है:

  • कथित बयान: 21 अप्रैल को राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन में स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ एक संवाद सत्र में हिस्सा लिया था। आरोप है कि वहां उन्होंने भगवान श्रीराम को ‘पौराणिक’ (Mythological) और उनसे जुड़ी कथाओं को काल्पनिक कहा था।

  • याचिकाकर्ता की दलील: एडवोकेट हरिशंकर पांडेय ने अदालत में दलील दी कि राहुल गांधी “राम द्रोही” हैं। उन्होंने विदेशों में जाकर भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए हैं, जिससे करोड़ों सनातनियों और देशवासियों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

  • मुख्य मांग: याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि राहुल गांधी के इन बयानों को ‘हेट स्पीच’ (Hate Speech) मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए जाएं।

अदालती कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन (Timeline)

इस मामले में कानूनी प्रक्रिया कई मोड़ों से होकर गुजरी है, जिसे नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

तारीख / समय कानूनी प्रगति व घटनाक्रम
12 मई 2025 अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की एमपी-एमएलए अदालत में पहली शिकायत दर्ज कराई।
28 मई 2025 ACJM कोर्ट ने आवेदन की जांच करने के बाद याचिकाकर्ता की दलीलों को ‘पोषणीय नहीं’ (Non-Maintainable) मानते हुए परिवाद को खारिज (Dismiss) कर दिया था।
26 सितंबर 2025 शिकायत खारिज होने के बाद हरिशंकर पांडेय ने जिला जज की अदालत में इस फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) दायर की।
25 मई 2026 विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को व्यक्तिगत (फिजिकल) रूप से पेश होने के लिए तीसरा और अंतिम नोटिस भेजा गया था।
01 जून 2026 (सोमवार) किसी भी स्तर पर राहुल गांधी या उनके अधिवक्ता के न आने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए ऑर्डर रिजर्व कर लिया।

आगे क्या होगा? कानूनी पहलू

कानूनी जानकारों के मुताबिक, अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है। आने वाले दिनों में कोर्ट सबसे पहले इस बात पर अपना निर्णय सुनाएगी कि क्या यह पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) सुनवाई के योग्य (Maintainable) है या नहीं। यदि कोर्ट इसे स्वीकार करती है, तो राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए जा सकते हैं, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है।

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