तगड़ा झटका! आज से महंगी हो गई CNG और रसोई गैस, सरकार ने तय की नई कीमतें

नई दिल्ली | बुधवार, 1 अप्रैल 2026

केंद्र सरकार ने नए वित्त वर्ष (2026-27) के पहले दिन आम जनता और उद्योगों को तगड़ा झटका दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) ने अधिसूचना जारी कर घरेलू प्राकृतिक गैस (APM Gas) की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार ने एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) के तहत गैस की ऊपरी सीमा (Ceiling Price) को $6.75 से बढ़ाकर $7.00 प्रति MMBTU कर दिया है।

क्यों बढ़ी कीमतें? नीतिगत और वैश्विक कारण

यह बढ़ोतरी 2023 में लागू की गई किरीट पारिख समिति की सिफारिशों के अनुरूप है। इस नीति के तहत:

  • प्राइसिंग फॉर्मूला: गैस की दरें भारतीय क्रूड बास्केट के औसत अंतरराष्ट्रीय दाम का 10% तय की जाती हैं।

  • सालाना वृद्धि: नीति के अनुसार, दो साल के स्थिर अंतराल के बाद हर साल कैप (ऊपरी सीमा) में $0.25 की वृद्धि का प्रावधान है।

  • ताजा स्थिति: चूंकि वर्तमान में वैश्विक तनाव के कारण कच्चा तेल $110 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, इसलिए फॉर्मूले के हिसाब से गणना की गई कीमत ($10.76) कैप से काफी ऊपर निकल गई है, जिसके चलते अब अधिकतम सीमा यानी $7 लागू होगी।

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इन क्षेत्रों पर पड़ेगा सीधा असर

देश के कुल गैस उत्पादन में APM गैस की हिस्सेदारी लगभग 60% है, जो मुख्य रूप से ONGC और OIL के पुराने क्षेत्रों से आती है। इस फैसले से निम्नलिखित क्षेत्र प्रभावित होंगे:

  1. CNG और PNG: दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में सीएनजी की कीमतों में ₹1 से ₹2 प्रति किलो और पीएनजी (रसोई गैस) के बिल में भी बढ़ोतरी तय है।

  2. उर्वरक उद्योग: यूरिया उत्पादन के लिए गैस एक मुख्य कच्चा माल है। लागत बढ़ने से खेती की लागत बढ़ेगी या सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।

  3. बिजली उत्पादन: गैस आधारित बिजली संयंत्रों से पैदा होने वाली बिजली महंगी हो सकती है।

महत्वपूर्ण आँकड़े और प्रावधान

विवरण वर्तमान स्थिति (1 अप्रैल 2026 से)
APM गैस की नई कीमत (Ceiling) $7.00 / MMBTU
पिछली कीमत (2025-26) $6.75 / MMBTU
कुल उत्पादन हिस्सेदारी ~9.2 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (60%)
न्यू वेल प्रीमियम नए कुओं से उत्पादन पर 20% अतिरिक्त प्रीमियम (ONGC/OIL के लिए)

वेस्ट एशिया तनाव और ऊर्जा सुरक्षा

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वेस्ट एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में घरेलू गैस की कीमतों में वृद्धि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (ONGC और OIL) को अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करेगी, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गहरे समुद्र (Deepwater) और कठिन क्षेत्रों से निकलने वाली गैस के लिए अलग से उच्च मूल्य सीमा तय की जाएगी, जिससे निजी क्षेत्र के निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष: सरकार का यह कदम एक तरफ जहाँ तेल कंपनियों को वित्तीय मजबूती देगा, वहीं दूसरी ओर आम आदमी के मासिक बजट पर महंगाई का नया बोझ डालेगा। आने वाले दिनों में इंद्रप्रस्थ गैस (IGL) और महानगर गैस (MGL) जैसी कंपनियाँ अपनी नई दरों का ऐलान कर सकती हैं।

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