लखनऊ न्यूज़: 19 साल बाद बाजारखाला हत्याकांड में बड़ा फैसला, विधायक अभय सिंह समेत सभी बरी

लखनऊ | बुधवार, 1 अप्रैल, 2026 ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित बाजारखाला दोहरे हत्याकांड में करीब दो दशक बाद इंसाफ की घड़ी आई है। लखनऊ की विशेष MP-MLA कोर्ट ने गोसाईगंज से विधायक अभय सिंह और उनके साथ नामित अन्य सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। 31 मार्च 2007 की उस खौफनाक रात ने पूरे लखनऊ को हिलाकर रख दिया था, जिसका कानूनी पटाक्षेप अब जाकर हुआ है।

🔹 क्या था 2007 का बाजारखाला दोहरा हत्याकांड?

यह मामला 31 मार्च 2007 का है, जब लखनऊ के बाजारखाला थाना क्षेत्र स्थित ‘पूर्वांचल टेंट हाउस’ गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था।

  • वारदात: हमलावरों ने टेंट हाउस के मालिक शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और उनके नौकर जितेंद्र त्रिपाठी की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी थी।

  • आरोप: मृतक के परिजनों ने तत्कालीन बाहुबली नेता और वर्तमान विधायक अभय सिंह समेत अन्य पर हत्या और साजिश रचने का आरोप लगाया था।

  • सनसनी: राजधानी के बीचों-बीच हुए इस शूटआउट ने यूपी की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था।

⚖️ कोर्ट का फैसला: ‘सबूतों की कमी’ बनी आधार

विशेष न्यायाधीश (MP-MLA कोर्ट) ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा।

  1. गवाहों के बयान: 19 साल लंबे चले इस ट्रायल के दौरान कई गवाह अपने बयानों से मुकर गए या उनके बयानों में विरोधाभास पाया गया।

  2. क्लीन चिट: कोर्ट ने विधायक अभय सिंह के अलावा रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

🚩 राजनीतिक मायने और हालिया घटनाक्रम

विधायक अभय सिंह के लिए यह फैसला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बड़ी राहत लेकर आया है।

  • राज्यसभा चुनाव कनेक्शन: गौर करने वाली बात यह है कि अभय सिंह हाल ही में तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से बगावत कर क्रॉस वोटिंग की थी।

  • पार्टी से निष्कासन: जून 2025 में सपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया था। अब इस अदालती फैसले के बाद उनके भाजपा या अन्य दलों के साथ भविष्य के गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

🗣️ प्रतिक्रियाएं: न्याय या अन्याय?

  • अभय सिंह: “हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। 19 साल तक हमने मानसिक प्रताड़ना झेली है, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई।”

  • पीड़ित पक्ष: मृतक शत्रुघ्न सिंह के परिजनों ने फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपील करेंगे।

📌 मामले के मुख्य बिंदु एक नजर में

मुख्य आरोपी विधायक अभय सिंह व 3 अन्य
घटना का समय 31 मार्च 2007 (रात करीब 9 बजे)
कुल समय 19 साल की कानूनी लड़ाई
कोर्ट का आदेश साक्ष्यों के अभाव में बरी (Acquittal)
वर्तमान स्थिति अभय सिंह अब निर्दलीय विधायक के तौर पर सक्रिय

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