झारखण्ड में ‘नो-एंट्री’ विवाद पर प्रशासन का दावा, 157 नहीं सिर्फ 76 लोगों की हुई थी मौत

Saransh Kanaujia
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रांची. चाईबासा के आसपास भारी वाहनों की आवाजाही रोकने (नो-एंट्री लागू करने) की मांग को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बीते दो साल में सड़क हादसों में 157 लोगों की मौत हो चुकी है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते हादसे प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है, इसलिए शहर की सुरक्षा के लिए भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद किया जाए।

प्रशासन ने कहा गलत हैं ग्रामीणों के आंकड़े :

ग्रामीणों के इस दावे को जिला प्रशासन ने भ्रामक और अतिरंजित बताते हुए खारिज कर दिया है। प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक कुल 76 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, न कि 157 जैसा कि ग्रामीणों ने दावा किया है।

ट्रकों के खड़ा रहने की शिकायतों के बाद हुआ संशोधन :

अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर 2024 से पहले चाईबासा–हाटगम्हरिया राष्ट्रीय मार्ग और बायपास रोड पर नो-एंट्री लागू थी, लेकिन ट्रकों के खड़ा रहने की शिकायतों के बाद इसमें संशोधन किया गया। संशोधन के बाद दिन के समय वाहनों के रुकने पर रोक लगाई गई है।

रिंग रोड परियोजना पर भी विवाद :

प्रशासन ने बताया कि चाईबासा शहर के चारों ओर करीब 14 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना का प्रस्ताव तैयार है। इससे भारी वाहनों को शहर में प्रवेश की आवश्यकता नहीं रहेगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। हालांकि, भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय ग्रामीण विरोध कर रहे हैं, जिससे परियोजना अटक गई है।

जानें क्षेत्रवार हादसों का ब्यौरा

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक

मुफस्सिल, झींकपानी, टोंटो और हाटगम्हरिया थाना क्षेत्रों में
जनवरी–दिसंबर 2024 में 23 मौतें
जनवरी–जुलाई 2025 में 15 मौतें दर्ज की गईं।

एनएच-220 (कुजू पुल से बायपास चौक तक) पर
2024 में 6 और 2025 में 2 मौतें हुईं।

बायपास चौक से गितिलिपी चौक तक
2024 में 5 और 2025 में 2 लोगों की जान गई।

एनएच-75ई (गितिलिपी चौक से जैंतगढ़ तक)
2024 में 12 और 2025 में 11 लोगों की मौत हुई।

साभार : दैनिक जागरण

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