बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने कानून-व्यवस्था के नाम पर थोपे कड़े प्रतिबंध

Saransh Kanaujia
3 Min Read

क्वेटा. बलूचिस्तान में सरकार ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए पूरे सूबे में 15 दिनों के लिए धारा-144 बढ़ा दी है. गृह विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक इस अवधि में हथियारों का प्रदर्शन और उपयोग, मोटरसाइकिल पर डबल सवारी, काली शीशे वाली गाड़ियां, बिना पंजीकरण वाली मोटरसाइकिलें, 5 से अधिक लोगों के जमावड़े, जुलूस और रैली पर प्रतिबंध रहेगा. निर्देश में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना, खासकर मफलर, मास्क या किसी भी अन्य तरीके से पहचान छिपाना भी पूरी तरह वर्जित होगा.

नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के केंद्रीय प्रवक्ता शाहजेब बलोच ने क्वेटा प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने जैसा है. उन्होंने आरोप लगायाकि बलूचिस्तान और देशभर के अन्य वंचित समूहों के कार्यकर्ताओं को न केवल परेशान किया जा रहा है बल्कि उन्हें जबरन गायब करने जैसी गंभीर चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है.

एनडीपी प्रवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप

शाहजेब ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी लापता बलोच और अन्य पीड़ितों को वापस लाने की व्यवस्था करे. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता पर आरोप है तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को सामूहिक सजा देना जातीय और राष्ट्रीय शुद्धिकरण की तरह है और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है.

क्वेटा-कराची राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने किया जाम

इस बीच खुजदार जिले के जवाह और जहरी इलाकों में तनाव बढ़ गया, जहां क्वेटा-कराची राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे दिन भी जाम रखा. यह विरोध तब शुरू हुआ जब हब चौकी से खुजदार जा रही एक वैन से यात्रियों को अगवा कर लिया गया. स्थानीय नेताओं का आरोप है कि हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक वैन को रोका, जिसमें से महिलाओं और बच्चों को उतारने के बाद पुरुष यात्रियों और वाहन को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया.

स्थानीय नेता बाबा फतेह जहरी ने फोन पर पत्रकारों को बताया कि खुजदार प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने के लिए बल प्रयोग किया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और युवाओं को पीटा. फतेह ने जहरी क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की ताकि खुजदार प्रशासन की ज्यादतियों को रोका जा सके.

साभार : एबीपी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article