बीजिंग | सोमवार, 24 अगस्त 2026
चीन का रियल एस्टेट क्षेत्र इतिहास के सबसे गंभीर मंदी के दौर से गुजर रहा है। पिछले छह वर्षों से जारी इस संकट में घरों की बिक्री, नए निर्माण और कीमतों पर अभूतपूर्व दबाव देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए घरों की कीमतों में वर्ष 2025 के स्तर से लगभग 40% तक की और अतिरिक्त गिरावट की आवश्यकता पड़ सकती है।
‘देखें और इंतजार करें’ की नीति में फंसे खरीदार
चीन के प्रमुख शहरों में खरीदारों ने संपत्तियों से दूरी बना ली है। अधिकांश संभावित खरीदार इस उम्मीद में बाजार से बाहर हैं कि कीमतें और नीचे गिरेंगी। इस “Wait and Watch” रवैये के कारण नए घरों की बिक्री बेहद सुस्त पड़ गई है।
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देश के 70 प्रमुख शहरों में से जुलाई 2026 में केवल 17 शहरों में ही नए घरों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। राष्ट्रीय स्तर पर नए और पुराने दोनों प्रकार के आवासीय घरों के दाम मासिक और वार्षिक आधार पर लगातार नीचे गिर रहे हैं।
क्यों जताई जा रही है 40% गिरावट की आशंका?
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अत्यधिक आवास आपूर्ति: चीन के द्वितीयक और तृतीयक श्रेणी के शहरों में लाखों की संख्या में तैयार मकान खाली पड़े हैं, जबकि उनके खरीदार गायब हैं।
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कमज़ोर जनसांख्यिकी: जनसंख्या में गिरावट और युवाओं में रोजगार की अनिश्चितता के कारण नए घर खरीदने की क्षमता घटी है।
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कर्ज में डूबे डेवलपर्स: एवरग्रैंड (Evergrande) और कंट्री गार्डन (Country Garden) जैसे दिग्गज डेवलपर्स के डिफ़ॉल्ट ने निवेशकों का भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया है।
ध्यान दें: यह 40% गिरावट का अनुमान कुछ स्वतंत्र विश्लेषकों का आकलन है, चीन सरकार का आधिकारिक बयान नहीं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे खराब दौर बीत चुका है और आने वाले समय में गिरावट की रफ्तार धीमी हो सकती है।
वैश्विक और चीनी अर्थव्यवस्था पर असर
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उपभोक्ता धारणा में कमी: चीन के मध्यम वर्ग की अधिकांश संपत्ति प्रॉपर्टी बाजार में लगी हुई है। कीमतों में गिरावट से संपत्ति का मूल्य घट रहा है, जिससे लोग खर्च कम कर रहे हैं।
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उद्योगों पर संकट: स्टील, सीमेंट, ग्लास, और कंस्ट्रक्शन मशीनरी जैसे बुनियादी उद्योगों में मांग की कमी के कारण रोजगार प्रभावित हुआ है।
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स्थानीय सरकारों का राजस्व घटा: चीनी प्रांतीय सरकारें अपनी आय का बड़ा हिस्सा जमीन की बिक्री से अर्जित करती थीं। इस संकट के कारण स्थानीय प्रशासनों पर भारी वित्तीय दबाव आ गया है।
क्या सरकार के प्रयास ला पाएंगे स्थिरता?
चीनी केंद्रीय बैंक और सरकार द्वारा ब्याज दरों में कटौती, होम लोन के नियमों में ढील और अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए बेलआउट पैकेज दिए गए हैं। इसके बावजूद, छोटे व आंतरिक शहरों में ओवरसप्लाई और भरोसे की कमी के कारण पूर्ण रिकवरी के संकेत फिलहाल कमजोर नजर आ रहे हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. चीन का रियल एस्टेट संकट कब शुरू हुआ था?
उत्तर: यह संकट वर्ष 2020-21 के दौरान शुरू हुआ, जब चीन सरकार ने अत्यधिक कर्ज में डूबे डेवलपर्स पर लगाम लगाने के लिए “थ्री रेड लाइन्स” (Three Red Lines) नीति लागू की।
Q2. क्या चीनी प्रॉपर्टी मार्केट की मंदी का असर भारत पर पड़ेगा?
उत्तर: हां, चीन में निर्माण गतिविधियां सुस्त होने से वैश्विक स्तर पर स्टील, तांबा और अन्य कमोडिटीज के दामों पर असर पड़ता है, जिससे भारतीय निर्यात और कमोडिटी बाजार प्रभावित होते हैं।
Q3. एवरग्रैंड (Evergrande) संकट क्या है?
उत्तर: एवरग्रैंड चीन का सबसे बड़ा रियल एस्टेट डेवलपर था, जो $300 बिलियन से अधिक के भारी कर्ज के कारण डिफ़ॉल्ट हो गया और यह इस संकट का सबसे बड़ा प्रतीक बना।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त किए गए विचार विश्लेषकों के आकलनों पर आधारित हैं और इन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।