हिन्दू केवल कोई पंथ नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्राण वायु है – शंकरलाल जी

Saransh Kanaujia
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– हिन्दू सम्मेलन में गूंजा सामाजिक समरसता का संकल्प

दौलाज, खिलचीपुर (मध्यप्रदेश)। दौलाज मण्डल स्थित केवल्य योग आश्रम में हिन्दुत्व के गौरव और सामाजिक एकता का अनुपम संगम देखने को मिला। भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुए विराट ‘हिन्दू सम्मेलन’ में सनातनी बंधुओं ने सहभागिता कर धर्म रक्षा और राष्ट्र रक्षा का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का मंगलारंभ भक्तिमय भजन-कीर्तन के साथ हुआ। तत्पश्चात, संपूर्ण वातावरण जय श्रीराम ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित जनसमूह ने भारत माता की भव्य महाआरती उतारी।

हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक शंकरलाल जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ मंच पर संत समाज के गौरव श्री मुनीशानंद जी सरस्वती (धार), श्री सत्यानंद जी त्यागी (रामनगर पहाड़ी), और श्री मोनानंद जी महाराज (काल्याखेड़ी हनुमान मंदिर) का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पद्धति से किया गया। इस अवसर पर गौ सेवकों और समाजसेवियों का सम्मान किया गया एवं मां नर्मदा देवी गौशाला में विधि-विधान से गौ-पूजन संपन्न हुआ।

मुख्य वक्ता ने कहा कि “हिन्दू केवल एक पंथ नहीं, राष्ट्र की प्राण वायु है”। “सनातन धर्म विश्व का एकमात्र वह मार्ग है जो सर्वे भवंतु सुखिनः की बात करता है, किंतु आज हमें अपनी उदारता के साथ-साथ अपनी शक्ति को भी पहचानना होगा। समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव वह दीमक है जो हिन्दू समाज को भीतर से खोखला कर रहा है। यदि हम जात-पात में बंटे रहे, तो विधर्मी हमारी जड़ों पर प्रहार करते रहेंगे।”

“आज जो स्थिति बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं की हो रही है, वह हमारे लिए एक गंभीर चेतावनी है। हमें सजग होना होगा ताकि भारत की पावन धरा पर कभी वैसी अराजकता न फैले। लव जिहाद जैसी साजिशें हमारे परिवारों को निशाना बना रही हैं, इसके लिए प्रत्येक हिन्दू परिवार को अपने घर में संस्कार और विमर्श की परंपरा शुरू करनी होगी। जब तक हम संगठित नहीं होंगे, तब तक चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएंगे। समरस समाज ही समर्थ राष्ट्र का आधार है।”

संत श्री परमानंद जी भारती (गोघरपुर) ने अपनी ओजस्वी वाणी में भजन के माध्यम से भाव प्रकट किए – “हिंद में पैदा हुए हिन्दू की संतान हैं, इनके खातिर मुझे वरदान ऐसा दीजिए, प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए।”

सम्मेलन के पश्चात क्षेत्र के गाँवों से आए ग्रामीणों ने एक साथ बैठकर ‘समरसता भोज’ में प्रसाद ग्रहण किया, जिसने ‘एक हिन्दू-श्रेष्ठ हिन्दू’ के भाव को चरितार्थ किया।

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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