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DRDO का धमाका: पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम का सफल परीक्षण, बढ़ी भारत की मारक क्षमता

Saransh Kanaujia
5 Min Read

नई दिल्ली. भारत की रक्षा शक्ति में आज एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) के ‘लॉन्ग रेंज गाइडेड’ वेरिएंट का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण के साथ ही भारतीय सेना की आर्टिलरी (तोपखाना) क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

सटीकता का नया मानक

पिनाका के इस नए संस्करण की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गाइडेड प्रणाली है। यह रॉकेट न केवल लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है, बल्कि उन्नत नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम से लैस होने के कारण अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता (Pinpoint Accuracy) के साथ नष्ट कर सकता है। परीक्षण के दौरान रॉकेट ने निर्धारित रेंज को कवर करते हुए अपने लक्ष्य पर सीधा प्रहार किया।

प्रमुख विशेषताएं और प्रभाव

  • लॉन्ग रेंज: यह गाइडेड रॉकेट सिस्टम करीब 70 से 90 किलोमीटर (संस्करण के आधार पर) की दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकता है।

  • स्वदेशी तकनीक: इसे पूरी तरह से DRDO की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है, जो रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करता है।

  • त्वरित प्रतिक्रिया: पिनाका सिस्टम महज 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागने की क्षमता रखता है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता।

रक्षा विशेषज्ञों की राय

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर मौजूदा सुरक्षा स्थितियों को देखते हुए, पिनाका का यह उन्नत संस्करण गेम-चेंजर साबित होगा। यह ऊंचे पहाड़ी इलाकों में छिपे दुश्मन के बंकरों और सैन्य कैंपों को नष्ट करने में अत्यधिक प्रभावी है।

निश्चित रूप से, पिनाका रॉकेट सिस्टम के गाइडेड (Guided) और अनगाइडेड (Unguided) संस्करणों के बीच तकनीकी अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। यह तुलना दिखाती है कि कैसे तकनीक ने इस सिस्टम को एक साधारण रॉकेट लॉन्चर से एक “सटीक मार करने वाले हथियार” (Precision Weapon) में बदल दिया है।

गाइडेड बनाम अनगाइडेड पिनाका

विशेषता पिनाका Mk-I (पुराना) गाइडेड पिनाका (नया परीक्षण)
रेंज (Range) 38 – 40 किलोमीटर 75 – 90+ किलोमीटर
सटीकता (Accuracy) कम (Area Weapon) अत्यधिक (Precision Strike)
नेविगेशन उपलब्ध नहीं IRNSS (NavIC) / GPS आधारित
कंट्रोल सिस्टम बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल और कैनर्ड्स (Canards)
लक्ष्य पूरे इलाके को साफ करना विशिष्ट बंकर, रडार या वाहन

रडार और नेविगेशन तकनीक

पिनाका गाइडेड रॉकेट की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘दिमाग’ है, जो इसे हवा में अपना रास्ता सुधारने की शक्ति देता है:

  • NavIC एकीकरण: यह भारत के अपने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम (NavIC) का उपयोग करता है। इसका मतलब है कि युद्ध के समय भारत को किसी अन्य देश के GPS पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।

  • सीकर और सेंसर: रॉकेट के अग्र भाग (Nose cone) में अत्याधुनिक सेंसर लगे होते हैं जो उड़ान के दौरान डेटा प्रोसेस करते हैं।

  • स्वायत्त सुधार: यदि हवा के दबाव या किसी अन्य कारण से रॉकेट अपने पथ से भटकता है, तो इसका ऑन-बोर्ड कंप्यूटर छोटे ‘फिन्स’ (Canards) को एडजस्ट करके उसे वापस सही लक्ष्य की ओर मोड़ देता है।

फायरपावर और घातक क्षमता

पिनाका लॉन्चर वाहन (TATRA ट्रक आधारित) की मारक क्षमता इसे दुनिया के सबसे घातक आर्टिलरी सिस्टम में से एक बनाती है:

  • साल्वो मोड (Salvo Mode): एक अकेला पिनाका ट्रक मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है।

  • विनाशकारी क्षेत्र: 12 रॉकेटों की एक पूरी बैटरी लगभग 3.9 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह से निष्क्रिय कर सकती है।

  • वॉरहेड (Warhead): इसमें हाई-एक्सप्लोसिव, एंटी-टैंक म्यूनिशन और ‘सब-म्यूनिशन’ लोड किए जा सकते हैं, जो एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करते हैं।

रणनीतिक महत्व

यह परीक्षण भारत के लिए क्यों मायने रखता है?

  1. लागत प्रभावी: एक महंगी मिसाइल (जैसे ब्रह्मोस) की तुलना में गाइडेड पिनाका काफी सस्ता है, जिससे इसे बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है।

  2. पहाड़ी युद्ध: हिमालय जैसे ऊंचे क्षेत्रों में, जहाँ दुश्मन चोटियों के पीछे छिपा होता है, पिनाका का ‘पिन्पॉइंट’ निशाना अचूक साबित होता है।

  3. निर्यात क्षमता: आर्मेनिया जैसे देशों ने पहले ही पिनाका में रुचि दिखाई है, जिससे भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा।

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