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ताइवान की घेराबंदी: चीन ने शुरू किया ‘जस्टिस मिशन 2025’, अब तक का सबसे बड़ा सैन्य युद्धाभ्यास

Saransh Kanaujia
3 Min Read

बीजिंग. चीन और ताइवान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। सोमवार को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के चारों ओर ‘जस्टिस मिशन 2025’ (Justice Mission 2025) नामक एक विशाल सैन्य अभ्यास शुरू करने की घोषणा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे आक्रामक सैन्य युद्धाभ्यास है, जिसमें चीन ने अपनी थल सेना, नौसेना, वायु सेना और रॉकेट फोर्स को एक साथ मैदान में उतारा है।

प्रमुख सैन्य गतिविधियाँ और रणनीति

चीनी सेना के ‘ईस्टर्न थिएटर कमांड’ के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ताइवान की पूर्ण नाकेबंदी (Blockade) और विदेशी हस्तक्षेप को रोकना है।

  • बंदरगाहों की घेराबंदी: चीनी जहाजों और विमानों ने ताइवान के प्रमुख बंदरगाहों, विशेष रूप से उत्तर में कीलुंग और दक्षिण में काऊशुंग को घेरने का अभ्यास शुरू कर दिया है।

  • हवाई और समुद्री शक्ति: ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एक ही दिन में रिकॉर्ड 89 चीनी लड़ाकू विमानों और 28 युद्धपोतों की उपस्थिति दर्ज की है।

  • लाइव-फायर ड्रिल: इस अभ्यास में पहली बार ताइवान के बेहद करीब ‘लाइव-फायर’ (असली गोला-बारूद का उपयोग) अभ्यास किया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

चीन की चेतावनी और ताइवान की प्रतिक्रिया

चीन ने इस कार्रवाई को ताइवान की “अलगाववादी ताकतों” और बाहरी देशों (अमेरिका और जापान) के लिए एक “कड़ी चेतावनी” बताया है। यह अभ्यास अमेरिका द्वारा ताइवान को 11 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री की मंजूरी और जापान के कड़े बयानों के विरोध में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने इस अभ्यास की कड़ी निंदा करते हुए इसे “क्षेत्रीय शांति को अस्थिर करने वाला कृत्य” कहा है। ताइवान ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मिसाइल प्रणालियों और लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया है।

वैश्विक प्रभाव

इस सैन्य अभ्यास ने वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं (विशेषकर सेमीकंडक्टर) के लिए चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि ताइवान जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।

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