दिल्ली में अब कारोबारियों को नहीं लेना होगा पुलिस से लाइसेंस

नई दिल्ली. दिल्ली सरकार की तरफ से दिल्ली के कारोबारियों को एक बड़ी राहत दी गई है. दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि अब होटल, मोटल, गेस्ट हाउस जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दिल्ली पुलिस से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है. दरअसल, दिल्ली के कारोबारियों को अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिल्ली पुलिस से लाइसेंस लेना पड़ता था. इसके लिए उन्हें दिल्ली पुलिस के दफ्तर के कई चक्कर काटने पड़ते थे. दिल्ली सरकार ने अब इस जिम्मेदारी से दिल्ली पुलिस को मुक्त कर दिया है और कहा कि दिल्ली पुलिस का ध्यान सिर्फ राज्य में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए होना चाहिए.

सरकार का दूरदर्शी दृष्टिकोण

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लाइसेंस की इस अनिवार्यता को खत्म करने को सरकार का एक बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा यह सुधार सरकार के दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अधिकतम शासन-न्यूनतम सरकार की नीति के अनुरूप ही कार्य कर रही है. इसके आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की पहली प्राथमिकता जनता के हित में काम करना है और इसी पर अमल करते हुए सरकार ने दिल्ली के कारोबारियों और पुलिस को बड़ी राहत दी है.

पुलिस अपराध खत्म करने पर देगी ध्यान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिस का काम लोगों को लाइसेंस वितरण करना नहीं है. उन्होंने कहा कि पुलिस बल को ऐसे कामों से मुक्त करना चाहिए ताकि वह राज्य में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने व अपराध पर नियंत्रण रखने में अपना ध्यान केंद्रित कर सके. गुप्ता ने कहा कि राजधानी में पुलिसिंग का विषय केंद्रीय मंत्रालय के अधीन होकर काम करता है. उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का मिशन है कि हम दिल्ली को न केवल भारत की राजनीतिक राजधानी बनाना चाहते हैं, बल्कि सुशासन का मॉडल भी बनाना चाहते हैं.

स्थानीय निकायों से प्राप्त होगें लाइसेंस

उप राज्यपाल वी के सक्सेना ने कहा कि इस लाइसेंस के वजह से न सिर्फ कारोबारियों को पुलिस दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं, बल्कि इससे पुलिस को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पुलिस की इन परेशानियों का निवारण करते हुए उन्होंने कहा कि कारोबारियों को दिए जाने वाले लाइसेंस अब स्थानीय निकायों जैसे दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर परिषद या दिल्ली छावनी बोर्ड के माध्यम से दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अब कारोबारियों को पुलिस से एनओसी पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी.

इन व्यवसायों को मिलेगी छूट

सक्सेना के आदेश के अनुसार इस छुट में शामिल व्यवसाय होटल, मोटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, स्विमिंग पुल, ऑडिटोरियम, वीडियो गेम पार्लर डिस्कोथेक और मनोरंजन पार्क जैसी संस्थाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन व्यवसायों को चलाने के लिए कारोबारियों को अलग-अलग एजेंसियों से लाइसेंस और एनओसी लेनी पड़ती है.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *