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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को दी सशर्त राहत

Saransh Kanaujia
3 Min Read

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से पकड़े गए कुत्तों को अब नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनकी मूल जगह पर छोड़ा जाएगा. केवल रेबीज से संक्रमित और ज्यादा आक्रामक कुत्ते ही शेल्टर में रखे जाएंगे. इस फैसले के बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर जुटे डॉग लवर्स और एनजीओ कार्यकर्ताओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई.

जंतर मंतर पर डॉग लवर्स की आवाज

एक पशु प्रेमी ने कहा, हमने उम्मीद की थी कि कोर्ट इंसानियत और विज्ञान को ध्यान में रखकर फैसला देगा. आज वही हुआ है. एनिमल डायरीज NGO की फाउंडर ने NDTV से बातचीत में कहा, “कोर्ट को उन लोगों पर भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो कुत्तों को सताते हैं. यह भी समझने की जरूरत है कि डॉग्स आक्रामक कब और क्यों होते हैं.” कुछ एक्टिविस्ट्स ने सवाल उठाया कि अगर रैबीज वाले कुत्तों को बाकी के साथ रखा गया तो संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा. साथ ही ‘आक्रामक’ डॉग कौन है, ये तय करना बहुत मुश्किल है. एक अन्य समूह ने कहा, MCD के लिए पूरे शहर में फीडिंग जोन तय करना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होगा.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद उनकी जगह छोड़ा जाएगा. सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक होगी. सिर्फ MCD द्वारा बनाए गए फीडिंग जोन में ही फीडिंग की जा सकेगी. साथ ही इन जोन में सूचना बोर्ड और हेल्पलाइन लगाए जाएंगे. वहीं, अगर आदेश का उल्लंघन किया गया तो 25,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा.कोर्ट ने ये भी कहा कि इच्छुक लोग MCD के जरिए कुत्तों को गोद भी ले सकते हैं.

क्यों अहम है ये फैसला?

पिछले आदेश के बाद दिल्ली में सैकड़ों कुत्तों को शेल्टर होम में भेजा गया था, जिस पर पशु प्रेमियों ने विरोध जताया. उनका कहना था कि कैद करना न तो मानवीय है और न ही व्यावहारिक. अब सबकी नजर इस बात पर है कि MCD किस तरह फीडिंग जोन और आक्रामक डॉग्स की पहचान को लागू करेगी. पशु प्रेमियों का कहना है कि असली चुनौती कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई है.

साभार : एनडीटीवी

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