ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तीन द्वीपों पर तैनात किये नए मिसाइल सिस्टम

तेहरान. ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते पहले ही ठीक नहीं और दिन-ब-दिन इनमें खटास बढ़ती जा रही है, ऐसा हालात होने के बावजूद ईरान ने बड़ा कदम उठाया है.  ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन द्वीपों – ग्रेटर टुंब, लेसर टुंब और अबू मूसा – पर नए मिसाइल सिस्टम तैनात किए हैं. ये द्वीप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास मौजूद हैं, जो दुनियाभर के कारोबार के लिए एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है. यहीं से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा भी गुजरता है.

600Km तक ईरान की पैनी नजर

ईरान के ज़रिए उठाए गए इस कदम का मकसद अपनी सैन्य ताकत में इजाफा करना है और जाहिर है कि उसके इस फैसले को दुश्मन देश भी भी सीधे चेतावनी के तौर पर देख रहे होंगे. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल अलीरेज़ा तांगसिरी ने कहा कि इन द्वीपों को हथियारों से लैस करना एक रणनीतिक जरूरत थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब दुश्मन के अड्डों, जहाजों और संपत्तियों को निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम है. अलीरेज़ा के मुताबिक ईरान ने जो मिसाइल तैनात किए हैं वो 600 किलोमीटर के अंदर किसी भी टार्गेट को तबाह कर सकते हैं.

अमेरिका-ईरान में पहले ही चल रहा विवाद

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक खत भेजकर परमाणु समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की थी. हालांकि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी चेतावनी को खारिज कर दिया और कहा कि ईरानी राष्ट्र के खिलाफ कोई भी गलत कदम उठाने पर अमेरिका को करारा जवाब मिलेगा.

निमंत्रण से ज्यादा धमकी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने ट्रंप के पत्र की पुष्टि करते हुए कहा था कि यह पत्र बुलाने से ज्यादा एक धमकी की तरह है, लेकिन इसमें कुछ सकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान जल्द ही इस पत्र का औपचारिक उत्तर देगा.

अमेरिका-UAE के लिए बुरी खबर

इस नई सैन्य तैनाती से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है. ईरान 1971 से इन द्वीपों पर नियंत्रण रखता है. हालांकि इसको लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव है, क्योंकि इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है. इसके अलावा  UAE भी इस पर अपना दावा करता है.

साभार : जी न्यूज

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