नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर ने नवाचार, आत्मनिर्भरता एवं उद्यमिता विकास” विषय पर संगोष्ठी का किया आयोजन

ललितपुर. नेहरू महाविद्यालय में प्लेसमेंट सेल एवं रसायन विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में उद्यमिता दिवस 2025 पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की माननीय प्राचार्य प्रोफेसर आशा साहू ने की तथा कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. जगवीर सिंह ने किया। प्राचार्य ने कहा कि यह दिवस उद्यमिता की शक्ति और समाज एवं अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव को रेखांकित करता है। भारत में भी आज हजारों महिला उद्यमी अपने-अपने क्षेत्रों में बदलाव की कहानी लिख रही हैं। महिला उद्यमियों में प्रमुख नाम रेणुका मिश्रा (रेनहोम्ज़), निशा नायर (यामिनी लाइफस्टाइल्स) और सौम्या खन्ना (द सोप कंपनी इंडिया) हैं। जिन्होंने वॉलमार्ट वृद्धि जैसे कार्यक्रमों से जुड़कर अपने सपनों को साकार किया और सैकड़ों महिलाओं के जीवन में रोजगार एवं आत्मनिर्भरता का प्रकाश फैलाया।

संगोष्ठी में विशेष वक्ता के रूप में डॉ. संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय उद्यमिता दिवस उद्यमिता की अलख जगाकर नवाचार और परिवर्तन को समर्पित है। आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह दिवस उन उद्यमियों को समर्पित है जो विकास और आय उत्पन्न करते हैं और नई तकनीकों और नवाचारों के विकास में योगदान देते हैं। इस प्रकार, उद्यमिता केवल व्यवसाय से कहीं आगे जाती है, यह विचारों को विकसित करने और समाज के सामने आने वाली समस्याओं को यथासंभव अपरंपरागत तरीकों से हल करने के लिए तत्पर रहने के बारे में है।

प्रोफ़ेसर अनिल सूर्यवंशी ने कहा कि वैश्विक उद्यमिता एक जटिल लेकिन लाभदायक प्रक्रिया है जो व्यवसायों को दुनिया भर में विकसित होने और फलने-फूलने का अवसर प्रदान करती है। डॉ. विनोद वर्मा ने उद्यमिता को आत्मनिर्भर भारत का आधार बताते हुए कहा कि “आज, कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को अपनाकर युवा नौकरी चाहने वाले के बजाय नौकरी देने वाले बन सकते हैं। जैविक खेती, कृषि-व्यवसाय, प्रसंस्करण इकाइयाँ और कृषि-तकनीक स्टार्टअप भविष्य की आवश्यकता हैं।”

डॉ. जगवीर सिंह ने कहा कि उद्यमिता, समाज में मूल्यवर्धन करने वाले उत्पादों, सेवाओं या समाधानों में नवाचार, विकास और विस्तार के अवसरों की पहचान, सृजन और उन्हें आगे बढ़ाने की एक सक्रिय प्रक्रिया है। उद्यमी दूरदर्शी वास्तुकार होते हैं जो अपनी रचनात्मकता, लचीलेपन और संसाधन-कुशलता का उपयोग ऐसे उद्यम स्थापित करने के लिए करते हैं जो मौजूदा प्रतिमानों को तोड़ते हैं, अपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और सकारात्मक बदलाव लाते हैं। एक उद्यमी में नवोन्मेषी मानसिकता, जोखिम उठाने की क्षमता, अनुकूलनशीलता, लचीलापन, दूरदर्शी नेतृत्व और संसाधन-अनुकूलन जैसे कई गुण होते हैं। इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव ने युवाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को एक लाभदायक उद्यम बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर डॉ. हरीश चंद दीक्षित, डॉ. गिरेंद्र सिंह, डॉ. विपिन शुक्ला आदि उपस्थित थे। कार्क्रम के अंत में डॉ. सुधाकर उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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