तन्वी शर्मा ने बैडमिंटन विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भारत को दिलाया सिल्वर मेडल

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. भारत की तन्वी शर्मा का बीडब्ल्यूएफ विश्व जूनियर चैंपियनशिप 2025 में शानदार प्रदर्शन रजत पदक के साथ समाप्त हुआ। इसका कारण यह है की 16 वर्षीय तन्वी शर्मा का जोशपूर्ण प्रयास रविवार को यहां नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लड़कियों के एकल फाइनल में थाईलैंड की अन्यापत फिचितप्रीचासाक को हराने के लिए पर्याप्त नहीं था।

सिल्वर के साथ तन्वी का सफर खत्म

फाइनल मुकाबले में तन्वी अन्यापत से 7-15, 12-15 से हार गईं और आई इस तरह घरेलू मैदान पर भारत का अभियान एक व्यक्तिगत रजत और एक टीम कांस्य पदक के साथ समाप्त हुआ। तन्वी इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने वाली पांचवीं भारतीय हैं। इससे पहले अपर्णा पोपट (1996), साइना नेहवाल (2006), सिरिल वर्मा (2015) और शंकर मुथुस्वामी (2022) ने यह उपलब्धि हासिल की थी।

लियू यांग मिंग यू ने जीता खिताब

लड़कों के एकल वर्ग के फाइनल में, चीन के लियू यांग मिंग यू ने इस साल की शुरुआत में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में मिली हार का बदला लेते हुए शीर्ष वरीयता प्राप्त इंडोनेशिया के मोहम्मद जकी उबैदिल्लाह को 15-10, 15-11 से हराकर खिताब अपने नाम किया।

तन्वी को करना पड़ा संघर्ष

तन्वी शुरुआती गेम में अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करती दिखीं। उन्होंने जल्दी-जल्दी अंक हासिल करने की कोशिश की लेकिन कई गलतियां कर बैठीं। अन्यपत की फ्लैट पुश और फ्लिक टॉस को जल्दी समझने की क्षमता भी भारतीय खिलाड़ी के लिए मददगार साबित नहीं हुई और थाई खिलाड़ी ने 5-6 से लगातार सात अंक हासिल कर अच्छी बढ़त बना ली और फिर केवल नौ मिनट में गेम अपने नाम कर लिया।

भारतीय खिलाड़ी ने मैच के अंतिम गेम में अपने स्ट्रोक्स खेलने में ज़्यादा सहजता दिखाई और यही कारण था की उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में पहली बार शॉर्ट सर्विस की और पहला शॉट गँवाने के बाद लगातार छह अंक हासिल किए। लेकिन अन्यापत ने तुरंत अपनी रणनीति बदली और तन्वी को लंबी रैलियों में उलझाए रखा और धैर्यपूर्वक खेलते हुए भारतीय प्रतिद्वंदी से गलतियाँ करवाईं। वह एक बार फिर लगातार सात अंक हासिल करने में सफल रहीं और 12-8 के स्कोर पर चार अंकों की बढ़त बना ली।

तन्वी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और अपनी फ्लिक पुश और स्लो ड्रॉप्स से प्रतिद्वंदी को लगातार परेशान करती रहीं, लेकिन अन्यापत रैलियों में टिकी रहीं और आखिरकार स्टिक स्मैश लगाकर मैच का अंत किया, जिससे स्टेडियम में मौजूद भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों का दिल टूट गया।

साभार : नवभारत टाइम्स

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