नागपुर हिंसा का मामला संसद में उठा, औरंगजेब की कब्र पर विवाद जारी

मुंबई. महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार को मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद दो गुटों के बीच टकराव हो गया. नागपुर में पहले महल और फिर हंसापुरी में हिंसा हुई, जिसके बाद कई इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा. नागपुर हिंसा का मामला संसद तक पहुंच गया है. कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने नागपुर में हुई हिंसा पर चर्चा के लिए राज्यसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है. नागपुर में अब हालात काबू में हैं. पुलिस का कहना है कि औरंगजेब की कब्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद दो गुटों के बीच टकराव हो गया, जिसके बाद महल इलाके में दोनों ओर से पथराव हुआ. वाहनों में आग लगा दी गई. हिंसा पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठी चार्ज भी किया.

पथराव, आगजनी… आखिर हुआ क्‍या?

हिंसक झड़प में दो समुदायों के युवकों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंके, कुछ गाड़ियां तोड़ी गईं, आगजनी हुई. डीसीपी निकेतन कदम पर भी हमला हुआ, गंभीर हालत में डीसीपी कदम को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने आरएसएस मुख्यालय वाले महल में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया. दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. नागपुर पुलिस ने प्रोहिबिट्री ऑर्डर इश्यू किया है साथ ही पुलिस ने अब तक 40 से 50 लोगों को हिरासत में लिया है. सीसीटीवी और वीडियो के आधार पर जिन लोगों ने हिंसा को अंजाम दिया उनकी धर पकड़ पुलिस कर रही है. एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी पुलिस ने शुरू कर दी है. साथ ही क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई है.

CM फडणवीस ने क्‍या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और नागपुर से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिंसा के मद्देनजर शांति और सद्भाव की अपील की है. पुलिस के अनुसार, यह तब शुरू हुआ जब कुछ लोगों ने महल इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास प्रदर्शन किया. सीएम फडणवीस ने शांति बनाए रखने की अपील की है और लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने को कहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महल इलाके में पथराव और तनावपूर्ण स्थिति के बाद पुलिस स्थिति को संभाल रही है. गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे फडणवीस ने यह भी कहा कि वह पुलिस के लगातार संपर्क में हैं और उन्होंने पुलिस से लोगों के साथ सहयोग करने को कहा है.

वो अफवाहें, जिनसे भड़की हिंसा

डीसीपी नागपुर अर्चित चांडक ने कहा, ‘यह घटना कुछ गलतफहमी के कारण हुई. स्थिति अभी नियंत्रण में है. यहां हमारा बल मजबूत है. मैं सभी से अपील करता हूं कि वे बाहर न निकलें…या पत्थरबाजी न करें. दरअसल, सोमवार को नागपुर में हिंसा भड़ने की वजह दो अफवाहें थी. नागपुर में बजरंग दल और विश्‍व हिंदू परिषद के विरोध प्रदर्शन के बीच पहली अफवाह यह फैली कि एक धार्मिक ग्रंथ को नुकसान पहुंचाया गया है. वहीं, दूसरी अफवाह कुछ असामाजिक तत्‍वों द्वारा ये फैलाई गई कि पवित्र चादर को आग लगा दी गई है. हालांकि, कहीं कुछ ऐसा हुआ ही नहीं था. इन अफवाहों से एक समुदाय विशेष के लोग भड़क गए और सड़कों पर उतर आए.

कांग्रेस के निशाने पर आई बीजेपी

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि नागपुर में दंगों की खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं. खेड़ा ने कहा कि महल मुख्यमंत्री का अपना क्षेत्र है. पिछले कई दिनों से 300 साल पुराने इतिहास को हथियार बनाकर इसका इस्तेमाल विभाजन, ध्यान भटकाने और अशांति पैदा करने के लिए किया जा रहा है. ये हिंसा केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर सत्तारूढ़ प्रशासन की विचारधारा उजागर करती हैं.

साभार : एनडीटीवी

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