जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंक के मददगारों को तलाशने के लिए 11 ठिकानों पर मारे छापे

Saransh Kanaujia
3 Min Read

जम्मू. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्ट्राइक किया था और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था. उसके बाद जब पाकिस्तान ने नापाक हरकत करने की कोशिश की थी और भारत पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करने की कोशिश की तो भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्तान के कई एयरबेस को तबाह कर दिए.

हालांकि अब पाकिस्तान और भारत के बीच सीजफायर हो गया है, लेकिन कश्मीर में आतंकियों के मददगार अब बच नहीं पाएंगे. आतंकवादियों के मददगारों को ढूंढकर निशाना बनाया जा रहा है. कश्मीर में आतंकवादियों के मददगारों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कार्रवाई की है. राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने शनिवार को मध्य और उत्तरी कश्मीर में लगभग 11 स्थानों पर छापेमारी की. ये छापे स्लीपर सेल मॉड्यूल से संबंधित चल रही जांच के तहत मारे गए, जिसमें आतंकवादियों के सहयोगियों को निशाना बनाया गया.

रेड में आपत्तिजनक सामग्री जब्त

एसआईए द्वारा जारी की गई जानकारी के मुताबिक, यह छापेमारी कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ की जा रही है. छापे के दौरान, आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया. प्रारंभिक जांच से पता चला कि ये संदिग्ध आतंकवादी साजिशों में सक्रिय रूप से शामिल थे और भारत विरोधी बयानों को फैलाने में लिप्त थे. एसआईए ने कहा कि ये कार्यवाही कश्मीर में असंतोष और सांप्रदायिक घृणा फैलाने की कोशिशों को विफल करने के लिए की जा रही है. एजेंसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि राज्य सरकार कश्मीर की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

18-22 आयु वर्ग के युवाओं को निशाना बना रहे हैं आतंकी

इसके अलावा, एसआईए ने यह भी बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि अधिकांश संदिग्ध युवा, जिनकी आयु 18 से 22 वर्ष के बीच है, ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित हुए थे. एजेंसी ने अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय के अन्य सदस्यों से अपील की कि वे युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें. कश्मीर में इस अभियान के तहत आतंकवादियों के मददगारों और समर्थकों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article