एसिड अटैक करने वालों पर ‘हत्या की कोशिश’ का मुकदमा चलना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. अब एसिड अटैक करने वाले बदमाशों पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा है कि एसिड अटैक करने वालों पर हत्या की कोशिश के प्रोविजन के तहत मुकदमा चलना चाहिए, उन मामलों में जहां उन पर विक्टिम को जबरदस्ती एसिड पिलाने का आरोप हो। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि ऐसे मामलों पर अटेम्प्ट टू मर्डर के तहत केस चलना चाहिए, न कि जान-बूझकर गंभीर चोट पहुंचाने के प्रोविजन के तहत।

बीएनएस में सेक्शन 109 के तहत मुकदमा चलना चाहिए

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कोई दूसरी राय नहीं होनी चाहिए। इन मामलों पर 307 (अटेम्प्ट टू मर्डर: पहले के आईपीसी का सेक्शन 307, BNS में सेक्शन 109) के प्रोविजन के तहत केस चलना चाहिए। पीनल लॉ में भी ज्यादातर घिनौने और अमानवीय मामलों में एक छूट जोड़ी जा सकती है। इन लोगों (हमलावरों) को समाज में घूमने का कोई हक नहीं है। वे समाज के लिए खतरा हैं, आम लोगों के लिए खतरा हैं और कानून के राज के लिए खतरा हैं।

शीर्ष अदालत 2009 के मामले में कर रही थी सुनवाई

कोर्ट 2009 की एसिड अटैक सर्वाइवर और एनजीओ ब्रेव सोल्स फाउंडेशन की फाउंडर शाहीन मलिक की PIL पर सुनवाई कर रही थी। शाहीन मलिक ने मांग की थी कि ज़बरदस्ती एसिड पीने के शिकार लोगों को पहचान मिलनी चाहिए और उन्हें दिव्यांग लोगों के अधिकारों के तहत “एसिड अटैक पीड़ितों” की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए।

साभार : नवभारत टाइम्स

‘गांधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ पुस्तक के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :

https://matribhumisamachar.com/2025/12/10/86283/

आप इस ई-बुक को पढ़ने के लिए निम्न लिंक पर भी क्लिक कर सकते हैं:

https://www.amazon.in/dp/B0FTMKHGV6

यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *