हम सिर्फ सिंधु जल समझौते में मध्यस्थ, नहीं कर सकते हस्तक्षेप : विश्व बैंक

Saransh Kanaujia
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वाशिंगटन. सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक से बड़ा झटका लगा है. वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि हम इस मामले में भारत को नहीं रोक सकते. वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बांगा ने कहा कि इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है. हमारी भूमिका केवल एक फेसिलिटेटर की है इसलिए हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे. दरअसल, 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी.

सिंधु, झेलम और चिनाब के जल बंटवारे के लिए 1960 में दोनों देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे. संधि वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में हुई थी और इसमें उसने भी हस्ताक्षर किए थे. सिंधु जल संधि के निलंबित होने के बाद मीडिया में ये खबरें चलने लगी कीं वर्ल्ड बैंक शायद इसमें हस्तक्षेप करेगा. मगर वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बांगा ने साफ कह दिया है वर्ल्ड बैंक की भूमिका केवल एक फेसिलिटेटर की है. हस्तक्षेप की बात बेबुनियाद है. ये फैसला उनका है कि वे क्या करते हैं.

भारत ने रोका चिनाब का पानी

सिंधु जल समझौते के निलंबित होने के बाद भारत ने चिनाब नदी का पानी रोक दिया था. चिनाब नदी का पानी रोकन के लिए बगलिहार डैम के सभी गेट बंद कर दिए. इसके बाद सिंधु और सहयोगी नदी झेलम का पानी रोकने की भी तैयारी हो रही है. भारत के इस कदम के बाद से चिनाब का बहाव 90 प्रतिशत तक कम हुआ है यानी पाकिस्तानी इलाके में जाने वाली चिनाब सूखन लगी है. सिंधु जल समझौते को पाकिस्तान की लाइफ लाइन माना जाता है. पाकिस्तान की करीब 21 करोड़ से ज्यादा की आबादी पानी के लिए सिंधु और उसकी चार सहायक नदियों पर निर्भर है. इसके अलावा 90% जमीन में सिंचाई का पानी सिंधु नदी से मिलता है.

सिंधु नदी प्रणाली में मुख्य नदी सिंधु और उसकी सहायक नदियां शामिल हैं. रावी, ब्यास, सतलुज, झेलम और चिनाब इसकी सहायक नदिया हैं. वहीं काबुल नदी भारतीय क्षेत्र से होकर नहीं बहती है. रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां जबकि सिंधु, झेलम तथा चिनाब को पश्चिमी नदियां कहा जाता है. इस नदी का पानी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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