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नए कानून से पाकिस्तान को बिना आरोप बलूचों को 90 दिनों तक हिरासत में रखने का मिला अधिकार

Saransh Kanaujia
3 Min Read

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के हिंसाग्रस्त प्रांत बलूचिस्तान की विधानसभा ने एक नया कानून पास किया है, जिसे लेकर मानवाधिकार समूह और बलूच सिविल सोसाइटी ने खतरनाक बताया है। मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि नया आतंकवाद विरोधी कानून बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के जुल्म को कई गुना बढ़ा देगा। नया कानून पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया एजेंसियों को बिना किसी आरोप के 90 दिनों तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है। खास बात ये है कि ऐसा केवल शक के आधार पर किया जा सकता है।

बलूच मानवाधिकार संस्था ने बलूचिस्तान विधानसभा से 4 जून को पारित आतंकवाद विरोधी (बलूचिस्तान संशोधन) विधेयक, 2025 के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है और इसे मानवाधिकारों के लिए खतरा बताया है। शुक्रवार को एक बयान में बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने विधेयक पारित किए जाने की निंदा करते हुए इसे गंभीर रूप से परेशान करने वाली घटना बताया। समूह ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का साफ उल्लंघन बताया और संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकर निकायों और लोकतांत्रिक सरकारों से हस्तक्षेप की मांग की है।

बलूचिस्तान बन जाएगा खुली जेल

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने कानून की निंदा करते हुए इसे नागरिकों की जिंदगी को सेना की कैद में बदलने वाला बताया। इसने कहा, ‘यह कानून बलूचिस्तान को एक कानूनी जेल में बदल देता है।’ समूह ने अधिनियम में एजेंसियों को दिए गए अधिकारों की तुलना नाजी जर्मनी और आधुनिक शिनजियांग सहित पूरे इतिहास में नजरबंदी प्रणालियों में इस्तेमाल की जाने वाली रणनीतियों से की। बीवाईसी ने भी संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक नागरिक समाज से हस्तक्षेप करने और इस्लामाबाद पर कानून को निरस्त करने के लिए दबाव डालने का आह्वान कर रहा है।

बलूचिस्तान में गायब हो रहे लोग

बलूचिस्तान में आम लोगों और युवाओं के जबरन गायब होने की घटनाएं लंबे समय से जारी हैं। परिवार दशकों से लापता अपनों के बारे में खबर का इंतजार कर रहे हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि राज्य सुरक्षा बल लोगों का अहपरण करते हैं। बाद में इनमें कई के शव बरामद होते हैं, जबकि कुछ पीड़ितों का 15 से 20 साल बाद भी पता नहीं चल पाता। कार्यकर्ताओं के अनुसार, नया कानून इन प्रथाओं को प्रभावी रूप से संहिताबद्ध करता है, जिससे पूरे समुदाय को राज्य की हिंसा के निरंतर भय में रहना पड़ता है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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