10 स्थानों पर यह व्यवस्था पहले से लागू
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि यह नई तकनीक देश के करीब 10 स्थानों पर लागू हो चुकी हैं। टेस्टिंग और मॉनिटरिंग के बाद अगले एक साल के अंदर इसे पूरे भारत के नेशनल हाइवे नेटवर्क पर लागू होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सिस्टम से टोल प्लाजा गायब हो जाएंगे और वाइन सीधे चलते हुए भुगतान पूरा कर सकेंगे।
कैसे काम करेगी ये तकनीक ?
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) तकनीक विकसित की है। इसका उद्देश्य भारत के टोल सिस्टम की पूरी तरह डिजिटल व इंटरऑपरेबल बनाना है। इसका मुख्य आधार फास्ट टैग तकनीक है। इसमें आरईआईडी यानी की रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह हाइवे टोल प्लाजा पर वाहन गुजरने के दौरान बिना रुके चालक से जुड़े बैंक खाते से टोल राशि अपने आप काट देता है।
इससे क्या लाभ होगा ?
गडकरी ने सदन को यह भी बताया कि देश में 4,500 राजमार्ग परियोजनाएं चल रही हैं। इनकी कुल लागत लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है। बड़ी मात्रा में हाईवे निर्माण के साथ डिजिटल टोलिंग सिस्टम लागू होने से भारत में सड़क यातायात और परिवहन की गति और भी तेज होने की उम्मीद है। समय की बचत भी होगी।
साभार : अमर उजाला
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