Warning: file_exists(): open_basedir restriction in effect. File(D:\wwwroot\new.matribhumisamachar.com/wp-content/themes/foxiz-child/assets/fonts/icons.woff2?ver=2.5.0) is not within the allowed path(s): (D:/wwwroot/new.matribhumisamachar.com/;C:/Windows/Temp/;C:/Temp/;D:/BtSoft/temp/session/) in D:\wwwroot\new.matribhumisamachar.com\wp-includes\link-template.php on line 4654

हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका की खारिज

Saransh Kanaujia
4 Min Read

नई दिल्ली. दिल्ली दंगों के मामले में 5 साल से जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और 7 अन्य आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट से भी झटका लगा जब अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर की एक डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है. दिल्ली दंगा मामले में अन्य आरोपियों में अतर खान, खालिद सैफी, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद शामिल हैं.

किसने क्या दलील दी?

निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए उमर खालिद की ओर पेश सीनियर एडवोकेट त्रिदीप ने दलील दी कि केवल व्हाट्सएप ग्रुप में होने से और बिना कोई संदेश भेजे कोई अपराध नहीं होता. उन्होंने कहा कि यह भी दलील दी कि खालिद से रुपये या किसी अन्य चीज की कोई बरामदगी नहीं हुई. साल 23-24 फरवरी 2020 की रात को कथित गुप्त बैठक बिल्कुल भी गुप्त नहीं थी जैसा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया है.

खालिद के वकील की दलील

आरोपी खालिद सैफी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन ने दलील दी कि सिर्फ मैसेजों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने पूरी कहानी बनाई है और उसी आधार पर मुझ पर UAPA लगाया है जिसके आधार पर जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने दलील दी कि क्या यह मुझे UAPA के तहत अभियोजन पक्ष का आधार भी बन सकता है? रेबेका जॉन ने आगे दलील दी कि खालिद सैफी को तीन सह-आरोपियों के साथ समानता के आधार पर जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए, जिन्हें जून 2021 में जमानत पर रिहा किया गया था.

शरजील इमाम ने दी क्या दलील?

शरजील इमाम ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह सभी सह-आरोपियों से पूरी तरह से अलग है और किसी भी प्रकार की साजिश या साजिश बैठकों का हिस्सा नहीं लिया, जैसा दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है. शरजील के वकील तालिब मुस्तफा ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा दंगों में शरजील इमाम की भूमिका 23 जनवरी 2020 तक बताई गई है और दिल्ली पुलिस द्वारा बिहार में उसके द्वारा दिया गया भाषण को आधार बनाया गया.

दिल्ली पुलिस ने दी क्या दलील?

दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एसजीआई तुषार मेहता ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि यदि आप राष्ट्र के खिलाफ कुछ कर रहे हैं, तो आपको तब तक जेल में रहना चाहिए, जब तक कि आप बरी या दोषी नहीं हो जाते. मेहता ने कहा कि आरोपियों का इरादा एक विशेष दिन चुनकर दंगे करना और अधिक आगजनी के जरिए देश को वैश्विक स्तर पर बदनाम करना था.

साभार : न्यूज18

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article