नाइजीरिया में दो आत्मघाती हमलों के कारण 18 की मौत, 42 घायल

एबूजा. पूर्वेात्तर नाइजीरिया में तीन आत्मघाती हमले हुए। इन तीन आत्मघाती हमलों में कम से कम 18 लोग मारे गए और 19 गंभीर रूप से घायल हुए। बोको हराम के आतंकवादियों ने 2014 में ग्वोजा पर कब्जा कर लिया था, जब समूह ने उत्तरी बोर्नो के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। 2015 में चाड की सेना की मदद से नाइजीरियाई सेना ने इस शहर पर पुनः कब्जा कर लिया था, लेकिन तब से समूह ने शहर के पास के पहाड़ों से हमले जारी रखे हैं। बता दें कि हिंसा के कारण नाइजीरिया के उत्तर पूर्व में 40,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, लगभग 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। यह संघर्ष पड़ोसी देशों नाइजर, कैमरून और चाड तक फैल चुका है। इसके कारण ही उग्रवादियों से लड़ने के लिए एक क्षेत्रीय सैन्य संगठन का गठन किया गया है।

ग्वोजा शहर में हुए तीन आत्मघाती विस्फोट हुए। पहला हमला एक में अपनी पीठ पर बच्चे को बांधे महिला ने किया। हमलावर महिला ने एक शादी समारोह में विस्फोटकों से विस्फोट किया। दूसरा हमला कैमरून के सीमावर्ती शहर में एक अस्पताल में हुआ। वहीं तीसरा हमला शादी में हुए हमले में मरे लोगों के अंतिम संस्कार के दौरान हुआ।
बोर्नेा राज्य आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी के अनुसार हमलों में 18 लोगों की मौत हुई है, वही 42 लोग घायल हुए हैं। मृत लोगों में बच्चे, पुरुष, महिलाएं और गर्भवती महिलाएं भी थीं। वहीं 42 घायलों में 19 गंभीर रूप से घायल हैं, उन्हें मैदुगुरी ले जाया गया है, वहीं 23 अन्य को निकाले जाने का इंतजार है। ग्वोजा में सेना की सहायता करने वाले मिलिशिया के एक सदस्य ने बताया कि सुरक्षा चौकी पर हुए एक अन्य हमले में उसके दो साथी और एक सैनिक मारे गए।

बेटी की मौत की आरोप में मां गिरफ्तार

उत्तर कैरोलिना में एक महिला को उसकी आठ वर्षीय बेटी की कार के अंदर लावारिस हालत में मौत हो गई। इसके बाद महिला को जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने, हत्या और बाल उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 36 वर्षीय महिला एशली स्टालिंग्स 26 जून को गर्म मौसम के कारण अपनी बेटी को कार में छोड़कर अपने कार्यालय चली गई। उनका कहना है कि उसने कार का एसी चालू छोड़ा था, लेकिन उसे लगा कि उसकी बेटी ने कार बंद कर दी होगी क्योंकि उसे ठंड लग रही थी। उनके कहा कि वह मैसेज में अपनी बेटी से बात कर रही थी। आखिरी मैसेज के लगभग डेढ़ घंटे बाद जब वह कार में पहुंची तो उसने देखा कि उसकी बेटी कार की पीछे की सीट पर बेहोशी की हालत में थी। वह सांस ले रही थी, लेकिन उसके मुंह से झाग निकल रहा था। उसे अस्पताल ले जाया गया, वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि हाइपरथर्मिया के कारण लड़की के मस्तिष्क में हर्निया हो गया था। वहीं लड़की की मां ने स्वीकार किया कि वह जानती थी कि बाहर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस था। उसे बेटी को कार में नहीं छोड़ना चाहिए था।

साभार : अमर उजाला

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