असम में बाढ़ से होने वाली तबाही के कारण हालात काबू में करना मुश्किल

गुवाहाटी. बदलते मौसम और बारिश ने देश के कई हिस्सों के लोगों के चेहरे पर मुस्कान खिलाई है तो पूर्वोत्तर इसकी मार से कराह रहा है। पिछले एक माह से बाढ़ से जूझ रहे असम और अरुणाचल में लोग अस्थायी कैंपों में रह रहे हैं। असम में बाढ़ से बुधवार को आठ और लोगों की जान चली गई। इसके साथ ही इस साल बाढ़, भूस्खलन और तूफान में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 56 हो गई है। वहीं, असम के 27 जिलों में करीब 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य में बाढ़ के हालातों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक कारणों से बाढ़ के हालात पनपे हैं और इन पर काबू पाना मुश्किल हो गया है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, सोनितपुर जिले के तेजपुर राजस्व सर्कल में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि मोरीगांव के मायोंग, डिब्रूगढ़ के नाहरकटिया, दर्रांग के पब मंगलाडी, गोलाघाट के डेरगांव, बिस्वनाथ का हलेम और तिनसुकिया का मार्गेरिटा में एक-एक व्यक्ति डूब गया। इसके अलावा, सोनितपुर, शिवसागर और गोलाघाट जिलों में तीन और लोग लापता हैं। उनके बाढ़ के पानी में बह जाने की आशंका है।

धुबरी जिले में सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित लोग

रिपोर्ट के अनुसार, बारपेटा, बिश्वनाथ, कछार, चराइदेव, चिरांग, दरांग, धेमाजी, धुबरी, डिब्रूगढ़, गोलपारा, गोलाघाट, हैलाकांडी, होजई, जोरहाट, कामरूप, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, पूर्व में कार्बी आंगलोंग, पश्चिम कार्बी आंगलोंग, करीमगंज, लखीमपुर, माजुली, मोरीगांव, नागांव, नलबाड़ी, शिवसागर, सोनितपुर और तिनसुकिया जिले में बाढ़ के कारण 16,25,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें धुबरी सबसे बुरी तरह प्रभावित है, जहां 2.23 लाख से अधिक लोग पीड़ित हैं। वहीं, प्रशासन 24 जिलों में 515 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित कर रहा है, जहां वर्तमान में 3,86,950 लोगों ने शरण ले रखी है।

नियंत्रण से बाहर हो गई है स्थिति- हिमंत बिस्व सरमा

कामरूप जिले में बाढ़ के हालातों की समीक्षा के दौरान सीएम सरमा ने कहा कि पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने की वजह से असम में विनाशकारी बाढ़ आई है। उन्होंने कहा कि चीन, भूटान और अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश की वजह से असम में बाढ़ से जूझ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि असम में बीते कुछ वर्षों में बाढ़ को नियंत्रित करने की कोशिशें की गईं थीं और इससे लोगों को राहत भी मिली थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की आवश्यकता है।

क्षतिग्रस्त हुए तटबंधों और सड़कों का पुनर्निमाण कराया जाएगा

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने गरल भट्टापारा के हालातों की समीक्षा की। इसके अलावा उन्होंने खाना नदी पर बने धारापुर जंगराबाड़ी फाटक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हुए तटबंधों और सड़कों का पुनर्निमाण कराया जाएगा। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों के शिविरों में भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। सीएम सरमा ने अधिकारियों के साथ नाव में सवार होकर बाढ़ के हालातों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि गुरुवार को वे माजुली का दौरा करेंगे। दरअसल, माजुली में भारी बाढ़ की वजह से तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया और इस वजह से एक विशाल क्षेत्र जलमग्न हो गया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ प्रभावित जिलों में अब बारिश का असर कम दिख रहा है। अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो हालात सुधर सकते हैं।

साभार : अमर उजाला

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