प्रशांत किशोर ने की नई पार्टी जन सुराज की घोषणा

पटना. महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर बिहार की राजनीति में एक नई सियासी पार्टी की एंट्री हो गई है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर आज बिहार में अपनी पार्टी जन सुराज का ऐलान कर दिया है। आज से प्रशांत किशोर पूर्ण तौर पर नेता बन गए हैं। उनके पास अपनी एक सियासी पार्टी हो गई है। अब तक दूसरी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर अब अपनी पार्टी के लिए इलेक्शन स्ट्रैटजी बनाएंगे। वहीं, आज जन सुराज पार्टी की रूपरेखा के बारे में कई फैसले लिए जाने हैं। पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा, कितने दिनों तक उसका कार्यकाल होगा, पार्टी की क्या रणनीति होगी, कौन क्या जिम्मेदारी संभालेगा? आज प्रशांत किशोर इन सब के बारे में विस्तार से चर्चा भी करेंगे।

पार्टी के अध्यक्ष के नाम पर लगी मुहर

अभी तक पार्टी के अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया गया है। दलित समाज से आने वाले मनोज भारती पार्टी अध्यक्ष होंगे। अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी में ऐसे लोगों का स्वागत है, जो बिहार में परिवर्तन लाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 30-35 साल में जनता ने सब पार्टियों को चुनकर देख लिया, लेकिन कोई उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।

पटना के वेटरनरी ग्राउंड में प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी जन सुराज का औपचारिक ऐलान किया। पीके अपने शेखपुरा वाले घर से पदयात्रा करते हुए वेटरनरी ग्राउंड पहुंचे। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी थे। मंच से संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि आप सभी को ‘जय बिहार’ इतनी जोर से बोलना है कि कोई आपको और आपके बच्चों को बिहारी न कहे और यह एक गाली जैसा लगे। आपकी आवाज दिल्ली और बंगाल तक पहुंचनी चाहिए, जहां बिहार के छात्र हैं। इसे तमिलनाडु और बंबई तक पहुंचना चाहिए, जहां भी बिहारी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें पीटा गया।

पार्टी बनाने से पहले 5000 KM की पदयात्रा

पीके ने दावा किया है कि एक करोड़ सदस्यों के साथ पार्टी का गठन किया जाएगा। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, नेतृत्व परिषद और संविधान की भी घोषणा की जाएगी। पार्टी की घोषणा से पहले प्रशांत किशोर 17 जिलों का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान वे 5000 KM की पदयात्रा के साथ 5 हजार 500 गांवों में चौपाल और सभाएं कर चुके हैं। प्रशांत किशोर ने पलायन से लेकर बेरोजगारी, शिक्षा और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं को पार्टी का मुद्दा बनाया है।

साभार : इंडिया टीवी

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *