Tag आधुनिक जीवन में अष्टावक्र गीता की प्रासंगिकता

अष्टावक्र गीता श्लोक 9: ‘निश्चय रूपी अग्नि’ से अज्ञान के घने वन को कैसे जलाएं? जानिए इसका गहरा अर्थ

ध्यान मुद्रा में बैठा व्यक्ति और आत्मज्ञान की निश्चयवह्नि अग्नि का प्रतीक

नई दिल्ली | मंगलवार, 7 जुलाई 2026 भारतीय आध्यात्मिक और सनातन परंपरा में अष्टावक्र गीता को आत्मज्ञान और अद्वैत वेदांत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शिखर ग्रंथ माना जाता है। इस दिव्य ग्रंथ में महर्षि अष्टावक्र और मिथिला के राजा…

अष्टावक्र गीता संदेश: क्या है ‘साक्षी भाव’? ऋषि अष्टावक्र का वो एक श्लोक जिसने राजा जनक को कराया था आत्मज्ञान

अष्टावक्र गीता के साक्षी भाव को दर्शाता हुआ एक शांत प्राकृतिक वातावरण में ध्यानमग्न साधक

नई दिल्ली । शनिवार, 4 जुलाई 2026 भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अष्टावक्र गीता को आत्मज्ञान का सबसे ऊंचा और सीधा ग्रंथ माना जाता है। इसमें ऋषि अष्टावक्र और मिथिला के राजा जनक के बीच हुआ संवाद किसी कठिन कर्मकांड की…

अष्टावक्र गीता प्रथम अध्याय तीसरा श्लोक: जानिए ‘साक्षी भाव’ का वास्तविक अर्थ और आत्मज्ञान का सबसे सरल मार्ग

नई दिल्ली। गुरूवार, 25 जून 2026 आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर दूसरा व्यक्ति तनाव, एंग्जायटी (चिंता) और मानसिक अशांति से जूझ रहा है। हम अपनी पहचान अपने पद, पैसे, रूप और इस भौतिक शरीर से जोड़ लेते हैं,…