Tag अष्टावक्र गीता के प्रेरणादायक श्लोक

अष्टावक्र गीता का शाश्वत संदेश: क्या है ‘साक्षी भाव’ और क्यों ‘मैं ही कर्ता हूँ’ का अहंकार है मानसिक विष?

महर्षि अष्टावक्र राजा जनक को आत्मज्ञान का उपदेश देते हुए

नई दिल्ली. रविवार, 5 जुलाई 2026 अष्टावक्र गीता के प्रथम अध्याय का आठवाँ श्लोक अहं कर्त्तेत्यहंमानमहाकृष्णाहिदंशितः । नाहं कर्त्तेति विश्वासामृतं पीत्वा सुखी भव ॥८॥ सरल हिन्दी अर्थ इस श्लोक में महर्षि अष्टावक्र कहते हैं कि “मैं ही सब कार्यों का…

अष्टावक्र गीता का यह एक श्लोक बदल सकता है आपका जीवन

अष्टावक्र गीता का श्लोक पढ़ते हुए महर्षि अष्टावक्र की आध्यात्मिक शिक्षा, जिसमें मुक्ति, सत्य, दया और संतोष का संदेश दिया गया है।

भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा में अष्टावक्र गीता को आत्मज्ञान और अद्वैत वेदांत का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। महर्षि अष्टावक्र और राजा जनक के मध्य हुआ यह संवाद आज भी आध्यात्मिक साधकों और सामान्य लोगों के लिए समान रूप…