गोंडा: आस्था के नाम पर ‘मजहबी सिंडिकेट’ का भंडाफोड़; पंडित बनकर घर में घुसे ठगों ने सांप का डर दिखाकर लूटा सोना

लखनऊ । शनिवार, 9 मई 2026

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने धार्मिक विश्वास और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के ददुवा बाजार इलाके में एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो हिंदू पंडितों का चोला ओढ़कर न केवल आर्थिक लूट कर रहा था, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ भी भद्दा मजाक कर रहा था।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित संजय कुमार रस्तोगी के घर में पिछले कुछ समय से परेशानियां चल रही थीं। पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाने के लिए उन्होंने अखबार में छपे एक विज्ञापन को देखकर ‘शिव शक्ति ज्योतिष’ से संपर्क किया। उन्हें लगा कि ‘पंडित रामस्वरूप शर्मा’ उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे।

लेकिन, जिन्हें वे पंडित समझ रहे थे, वे असल में बुलंदशहर और मेरठ के रहने वाले नमशेर, हसरत अली, इमरान, इन्साद और तोहिद थे। इन जालसाजों ने हिंदू नाम अपनाकर और माथे पर तिलक लगाकर संजय के घर में प्रवेश किया।

42 दिनों का ढोंग और ‘काला सांप’ का खौफ

यह गिरोह कितना शातिर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 42 दिनों तक अनुष्ठान का नाटक किया ताकि किसी को शक न हो।

  • अनुष्ठान का जाल: ठगों ने परिवार को विश्वास दिलाया कि एक विशेष पूजा से ही खुशहाली आएगी।

  • जेवरात की मांग: पूजा के नाम पर उन्होंने करीब 750 ग्राम सोने और चांदी के जेवरात एक कलश (मटके) में रखवाए।

  • काला नाग का जादू: पूजा के दौरान अचानक कलश से एक जिंदा काला सांप निकला। यह देख परिवार बुरी तरह डर गया। ठगों ने इसी डर का फायदा उठाते हुए कहा, “देवता अत्यंत क्रोधित हैं, अनिष्ट टालने के लिए तुरंत दूसरे कमरे में चले जाएं और बाहर न निकलें।”

जैसे ही परिवार कमरे में गया, ये बहरूपिए जेवरात और नकदी समेटकर रफूचक्कर हो गए।

पुलिसिया कार्रवाई और चौंकाने वाले खुलासे

गोंडा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस ‘मजहबी सिंडिकेट’ के पांचों सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से जो बरामदगी हुई है, वह इनके नेटवर्क की गहराई को दर्शाती है:

  1. नकदी और जेवरात: दो लाख रुपये कैश और बड़ी मात्रा में चोरी के आभूषण।

  2. फर्जी पहचान पत्र: इनके पास से 5 कूटरचित (Fake) निर्वाचन पहचान पत्र मिले हैं, जिनसे ये अपनी पहचान बदलकर रहते थे।

  3. लॉजिस्टिक्स: एक आई-10 कार (फर्जी नंबर प्लेट के साथ) और 25 मोबाइल फोन।

अंधविश्वास और सुरक्षा: कुछ जरूरी सुधार

इस घटना ने समाज के सामने कुछ कड़वे सच रखे हैं। अक्सर लोग विज्ञापनों के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई और सुरक्षा को दांव पर लगा देते हैं।

  • पहचान की पुष्टि: किसी भी बाहरी व्यक्ति को घर के भीतर धार्मिक कार्यों के लिए बुलाने से पहले उनकी पहचान की पुष्टि स्थानीय स्तर पर जरूर करें।

  • अंधविश्वास से दूरी: यदि कोई “चमत्कार” दिखाने या कीमती सामान “दोगुना” करने का दावा करे, तो वह 100% ठग है।

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