नई दिल्ली । बुधवार, 6 मई 2026
देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसी साजिश को विफल कर दिया है जो मानवता के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खुलासा किया है कि आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) भारत में ‘बायोटेररिज्म’ (जैविक आतंकवाद) के जरिए तबाही मचाने की फिराक में था। इस मामले में एक एमबीबीएस डॉक्टर सहित तीन लोगों के खिलाफ अहमदाबाद की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है।
क्या है ‘बायोटेररिज्म’ और राइसिन का खतरा?
इस साजिश का सबसे डरावना पहलू था ‘राइसिन’ (Ricin) नामक जहर का इस्तेमाल। एनआईए के अनुसार, हैदराबाद के रहने वाले डॉक्टर सैयद अहमद मोहिउद्दीन ने अपने ही घर को एक सीक्रेट लैब में बदल दिया था। वहां वह अरंडी के बीजों से राइसिन निकालने की प्रक्रिया पर काम कर रहा था।
तथ्य जांच: राइसिन एक अत्यंत घातक जहर है। अगर इसे हवा, पानी या भोजन के जरिए फैलाया जाए, तो यह बहुत कम मात्रा में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ले सकता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रासायनिक हथियार की श्रेणी में रखा गया है।
मुख्य साजिशकर्ता और उनकी भूमिका
एनआईए की चार्जशीट में तीन मुख्य आरोपियों का नाम शामिल है:
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डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन (हैदराबाद): मुख्य साजिशकर्ता, जिसने चीन से डॉक्टरी की पढ़ाई की। इसे दक्षिण एशिया का ISIS ‘अमीर’ बनाने का वादा किया गया था।
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आजाद (उत्तर प्रदेश): हथियारों और टेरर फंडिंग के लिए जिम्मेदार। इसने राजस्थान से हथियारों की खेप गुजरात पहुंचाई थी।
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मोहम्मद सुहैल (उत्तर प्रदेश): युवाओं को भड़काने, रेकी करने और संगठन के लिए वफादारी की शपथ (बैयत) दिलवाने का काम करता था।
ऑपरेशन का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
इस पूरी साजिश की पहली कड़ी नवंबर 2025 में तब जुड़ी जब गुजरात एटीएस ने मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा से पकड़ा। उसके पास से 4 लीटर अरंडी का तेल और अवैध हथियार बरामद हुए थे। जनवरी 2026 में मामला एनआईए को सौंपा गया, जिसके बाद इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तार सुलझते चले गए।
