केरल चुनाव परिणाम 2026: 10 साल बाद UDF की सत्ता में वापसी, ‘लाल किले’ में बड़ी सेंध

तिरुवनंतपुरम | अपडेटेड : मंगलवार, 5 मई 2026  

केरल की राजनीति में एक दशक बाद बड़ा उलटफेर हुआ है। राज्य की जनता ने एक बार फिर अपनी “सत्ता परिवर्तन” की रवायत को कायम रखते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को स्पष्ट बहुमत दिया है। इस जीत ने न केवल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ‘तीसरी पारी’ (Hattrick) के सपने को तोड़ दिया, बल्कि केरल में वामपंथी शासन (LDF) के प्रभुत्व पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

चुनावी विश्लेषण: सीटों का गणित

इस बार के परिणामों में UDF ने जादुई आंकड़े (71) को पार करते हुए 102 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, पिछली बार इतिहास रचने वाली LDF महज 35 सीटों पर सिमट गई। सबसे चौंकाने वाला परिणाम भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का रहा, जिसने केरल में अपना खाता खोलते हुए 3 विधानसभा सीटों पर विजय प्राप्त की।

गठबंधन सीटें (2026) प्रमुख दल
UDF 102 कांग्रेस (63), IUML (22), केरल कांग्रेस (7)
LDF 35 CPI(M) (26), CPI (8)
NDA 3 BJP (3)
अन्य 0

UDF की जीत के 3 मुख्य कारण

  1. सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): लगातार 10 वर्षों के शासन के बाद जनता के बीच बदलाव की इच्छा प्रबल थी। भ्रष्टाचार के आरोपों और शासन संबंधी कुछ विवादों ने LDF को नुकसान पहुँचाया।

  2. अल्पसंख्यक मतों का ध्रुवीकरण: मुस्लिम और ईसाई मतदाताओं ने इस बार UDF पर अधिक भरोसा जताया, जिसका सीधा लाभ कांग्रेस और IUML को मिला।

  3. संगठनात्मक एकता: वी.डी. सतीशन और के. सुधाकरण के नेतृत्व में कांग्रेस इस बार अधिक एकजुट नजर आई, जिसने ग्रासरूट स्तर पर बेहतर काम किया।

भाजपा के लिए ऐतिहासिक पल

केरल में पहली बार भाजपा (BJP) ने तीन सीटें जीतकर विधानसभा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह राज्य की द्विध्रुवीय (Bipolar) राजनीति में एक नए तीसरे ध्रुव के उदय का संकेत माना जा रहा है।

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