मंगलुरु कुकर ब्लास्ट मामला: आतंकी शारिक को 10 साल की कठोर जेल, मंदिर को दहलाने की थी साजिश

बेंगलुरु । मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 

कर्नाटक के तटीय शहर मंगलुरु को दहलाने की बड़ी साजिश रचने वाले आतंकी मोहम्मद शारिक को कानून का कड़ा सबक मिला है। बेंगलुरु स्थित एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने सोमवार (27 अप्रैल, 2026) को शारिक को 10 साल की कड़ी सजा और ₹93,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यह सजा भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत दी गई है।

क्या था पूरा मामला?

घटना 19 नवंबर, 2022 की है, जब मंगलुरु के कंकनाडी इलाके में एक चलते ऑटो-रिक्शा में अचानक विस्फोट हो गया था। जांच में पता चला कि यात्री के वेश में बैठा मोहम्मद शारिक अपने बैग में एक प्रेशर कुकर आईईडी (IED) ले जा रहा था। यह बम मंगलुरु के प्रसिद्ध कदादरी मंजुनाथ मंदिर में ब्लास्ट करने के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन टाइमर की खराबी या तकनीकी चूक के कारण यह मंदिर पहुँचने से पहले ही ऑटो में फट गया।

विस्फोट इतना भीषण था कि शारिक खुद 40% तक झुलस गया था और ऑटो चालक भी गंभीर रूप से घायल हुआ था।

NIA की जांच में हुए बड़े खुलासे

एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, शारिक ‘इस्लामिक स्टेट’ (IS) की विचारधारा से बुरी तरह प्रभावित था। वह शिवमोग्गा मॉड्यूल का हिस्सा था और उसने बम बनाने की ट्रेनिंग ऑनलाइन माध्यमों से ली थी। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए ‘प्रेमराज’ नाम से फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था।

जांच में यह भी सामने आया कि वह पहले भी देश विरोधी गतिविधियों और भड़काऊ वॉल पेंटिंग्स के मामले में गिरफ्तार हो चुका था, लेकिन जमानत पर बाहर आकर उसने फिर से आतंकी साजिश रची।

अदालत का फैसला और सुधार की गुहार

दिसंबर 2025 में शारिक ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार (Plead Guilty) कर लिया था। सजा सुनाते वक्त शारिक ने अदालत से दया की अपील की थी, जिसमें उसने अपनी छोटी बेटी और परिवार की आर्थिक स्थिति का हवाला दिया था। हालांकि, मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए अदालत ने उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

निष्कर्ष

यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। इस ब्लास्ट ने न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश को हिला दिया था। शारिक को मिली यह सजा उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो देश की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं।

नोट: कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में इसे केवल एक दुर्घटना बताया गया था, लेकिन NIA की गहन जांच ने स्पष्ट कर दिया कि यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था जिसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना था। वर्तमान में, शारिक बेंगलुरु की जेल में अपनी सजा काट रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *