2006 मालेगांव ब्लास्ट मामला: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चारों आरोपियों को किया बरी, 20 साल बाद भी न्याय अधूरा?

मुंबई | बुधवार, 22 अप्रैल 2026

महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में 8 सितंबर 2006 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (22 अप्रैल 2026) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार मुख्य आरोपियों— राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवरिया और लोकेश शर्मा को सभी आरोपों से मुक्त (Discharge) कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की खंडपीठ ने विशेष एनआईए (NIA) अदालत द्वारा सितंबर 2025 में आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि इन आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया (Prima Facie) पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

जांच के बदलते रुख: ATS से NIA तक

इस केस की सबसे बड़ी पहेली इसकी जांच एजेंसियां और उनकी बदलती थ्योरी रही हैं:

  1. Maharashtra ATS: शुरुआत में एटीएस ने मुस्लिम समुदाय के 9 युवकों को गिरफ्तार किया और सिमी (SIMI) का हाथ बताया।

  2. CBI: सीबीआई ने भी शुरुआत में एटीएस की थ्योरी का समर्थन किया।

  3. NIA: 2011 में जब जांच एनआईए को सौंपी गई, तो स्वामी असीमानंद के इकबालिया बयान के आधार पर जांच का रुख दक्षिणपंथी समूहों की ओर मुड़ गया। इसके बाद इन चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

ताजा अपडेट (Updates)

  • मौतों का आंकड़ा: शुरुआत में 37 मौतों की बात कही गई थी, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड और हालिया अदालती दस्तावेजों के अनुसार इस हमले में 31 लोगों की जान गई थी और 312 लोग घायल हुए थे।

  • सबूतों का अभाव: हाई कोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि एनआईए के पास कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है और न ही घटनास्थल से आरोपियों को जोड़ने वाला कोई ठोस फोरेंसिक लिंक मिला।

  • देरी की माफी: अदालत ने अपील दायर करने में हुई 49 दिनों की देरी को माफ करते हुए मेरिट के आधार पर सुनवाई की।

केस का तुलनात्मक विवरण

विवरण तथ्य
घटना का स्थान हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान, मालेगांव
आरोपी जिन्हें राहत मिली राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर नरवरिया, लोकेश शर्मा
मुख्य तर्क कोई चश्मदीद गवाह नहीं, आरडीएक्स (RDX) के सबूत नहीं मिले
वर्तमान स्थिति ट्रायल समाप्त, सभी आरोपी बरी

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