कानपुर मंडी भाव: गेहूं और सरसों की कीमतों में स्थिरता, क्या बेमौसम बारिश बिगाड़ेगी बाजार का गणित?

कानपुर | शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक नगरी कानपुर की चकरपुर और कल्यानपुर अनाज मंडियों में शुक्रवार को कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। जहाँ एक ओर गेहूं और सरसों की कीमतों में स्थिरता दर्ज की गई, वहीं बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की खबरों ने व्यापारियों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही रहा, तो आवक प्रभावित होने से कीमतों में उछाल आ सकता है।

📉 मंडी का ताजा हाल: अनाज और दलहन के भाव

शुक्रवार को मंडियों में आवक सामान्य रही, जिसके चलते कीमतों पर कोई विशेष दबाव नहीं दिखा। बाजार का विस्तृत ब्योरा नीचे दिया गया है:

प्रमुख अनाज (प्रति क्विंटल)

  • गेहूं (दारा मिल): ₹2,300 (औसत भाव)।

  • गेहूं (दड़ा व फार्म): दड़ा ₹2,600 से ₹2,625 और फार्म क्वालिटी ₹2,800 से ₹2,850 के बीच रही।

  • धान व चावल: धान ₹2,082 और कॉमन चावल ₹3,750 के स्तर पर टिका रहा।

  • मक्का व बाजरा: मक्का ₹1,900-₹2,200 और बाजरा ₹1,900-₹2,100 प्रति क्विंटल बिका।

दलहन और तिलहन (प्रति क्विंटल)

  • सरसों: औसत भाव ₹5,714 दर्ज किया गया (दायरा: ₹5,400 से ₹5,800)।

  • अरहर: माँग में मजबूती के चलते यह ₹7,000 से ₹7,500 के बीच रही।

  • अन्य दालें: चना ₹5,400-₹5,500, मसूर ₹5,650-₹5,850 और लाही ₹6,700-₹6,800 के भाव पर बंद हुई।

⛈️ मौसम का प्रभाव: किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

हाल ही में कानपुर और आसपास के इलाकों (जैसे जालौन और हमीरपुर) में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कटी हुई फसलों को काफी नुकसान पहुँचाया है। कृषि वैज्ञानिकों (CS Azad University) के अनुसार, अप्रैल के मध्य तक मौसम में यह अस्थिरता बनी रह सकती है। खेतों में पड़ी गेहूं की फसल के काले पड़ने और दाने झड़ने की आशंका से बाजार में ‘क्वालिटी अनाज’ की कमी हो सकती है, जिससे आने वाले हफ्तों में प्रीमियम गेहूं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

🏛️ सरकारी खरीद और निर्यात का रुख

केंद्र सरकार ने इस वर्ष 303 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। साथ ही, भारत द्वारा गेहूं निर्यात पर से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार की निगाहें भी स्थानीय मंडियों पर हैं। कानपुर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकारी खरीद केंद्रों पर दबाव बढ़ता है, तो निजी मंडियों में भी भाव को समर्थन मिलेगा।

💡 व्यापारियों के लिए सलाह

बाजार के जानकारों का कहना है कि दलहन (विशेषकर अरहर और चना) में अभी हल्की नरमी है, लेकिन नई फसल की आवक में देरी होने पर कीमतों में सुधार की पूरी संभावना है। छोटे निवेशकों और व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम के अपडेट और मंडियों में आवक के स्तर पर पैनी नजर रखें।

नोट: मंडी भाव हर दिन आवक और गुणवत्ता के आधार पर बदल सकते हैं। व्यापार करने से पहले स्थानीय मंडी समिति से भाव की पुष्टि अवश्य करें।

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