दुनिया का सबसे महंगा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford सीवेज संकट में, ईरान मिशन पर संकट के बादल

वाशिंगटन. मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली और दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत, USS Gerald R. Ford (CVN-78), एक अजीबोगरीब और गंभीर तकनीकी संकट से जूझ रहा है। 13 बिलियन डॉलर (करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये) की लागत से बना यह ‘तैरता हुआ किला’ वर्तमान में सीवेज और प्लंबिंग सिस्टम की विफलता के कारण सुर्खियों में है।

1. मिशन ‘ईरान’: 6 महीने की तैनाती अब 11 महीने तक बढ़ी

रिटायर्ड रियर एडमिरल मार्क मोंटगोमरी के अनुसार, एक एयरक्राफ्ट कैरियर की मानक तैनाती (Deployment) 6 महीने की होती है। लेकिन भू-राजनीतिक अस्थिरता और ईरान की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों के चलते, फोर्ड की तैनाती को बार-बार बढ़ाया गया है।

  • वर्तमान स्थिति: सैनिक पहले ही 8 महीने समुद्र में बिता चुके हैं।

  • संभावित विस्तार: तनाव को देखते हुए इसे 11 महीने तक खींचा जा सकता है।

  • रणनीतिक कदम: इसे दूसरे अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके।

2. $13 बिलियन के पोत पर ‘प्लंबिंग’ की बड़ी विफलता

USS Gerald R. Ford अपनी अत्याधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है, जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) शामिल है। हालांकि, जहाज का सबसे बुनियादी हिस्सा यानी ‘सीवेज सिस्टम’ इसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो रहा है।

वैक्यूम सिस्टम की खराबी:

जहाज पर लगा वैक्यूम आधारित प्लंबिंग सिस्टम (जो हवाई जहाजों जैसा होता है) लगातार चोक हो रहा है।

  • ग्रिड फेलियर: एक टॉयलेट में खराबी आने पर पूरे सेक्शन का सक्शन प्रेशर खत्म हो जाता है।

  • मलबा: मेंटेनेंस के दौरान पाइपों में कपड़े, टी-शर्ट और रस्सियां फंसी मिली हैं।

  • लागत: अमेरिकी सरकारी ऑडिट (GAO) के अनुसार, इस सिस्टम की एक बार की गहरी एसिड सफाई (Acid Flush) में लगभग $400,000 (3.3 करोड़ रुपये) का खर्च आता है।

3. सैनिकों का टूटता मनोबल: “घर जाने की आस, पर मिला जाम टॉयलेट”

लगातार बढ़ती तैनाती और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने 5,000 से अधिक नौसैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है।

  • सीमित संपर्क: गोपनीय मिशन के कारण सैनिक अपने परिवारों से बात नहीं कर पा रहे हैं।

  • इस्तीफे की लहर: रिपोर्ट के अनुसार, कई युवा सैनिकों ने इस कड़वे अनुभव के बाद री-एनलिस्टमेंट (दोबारा सेना में शामिल होना) न करने और नेवी छोड़ने का मन बना लिया है।

  • असंतोष: जहाज पर मौजूद एक नाविक के अनुसार, “हथियारों से ज्यादा हमें एक काम करने वाले टॉयलेट की जरूरत है।”

4. क्या यह अमेरिकी सैन्य तैयारियों के लिए चेतावनी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि ‘लॉजिस्टिकल फेलियर’ है। अगर ईरान के साथ युद्ध की स्थिति बनती है, तो थके हुए सैनिक और तकनीकी रूप से जूझता हुआ युद्धपोत अमेरिका के लिए बड़ी कमजोरी साबित हो सकता है।

विशेषज्ञ की राय: “जब आप दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत बनाते हैं, तो आपको उसके रखरखाव (Maintenance) को भी उतना ही सरल रखना चाहिए। फोर्ड का जटिल डिजाइन अब उसकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गया है।”

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • युद्धपोत: USS Gerald R. Ford (दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत)।

  • समस्या: वैक्यूम प्लंबिंग और सीवेज सिस्टम का फेल होना।

  • तनाव: ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई और विस्तारित तैनाती।

  • प्रभाव: 5000 सैनिकों का गिरता मनोबल और तकनीकी चुनौतियां।

Matribhumi Samachar – International News

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